रांची. माइनिंग चालान की समस्या और बिटुमिन की बढ़ी कीमत से परेशान संवेदक संगठनों ने सरकार से राहत की मांग की है. रांची सेंटर बिल्डर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक प्रधान ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में कहा कि माइनिंग चालान की व्यवस्था में बदलाव के कारण पिछले चार महीने से बड़ी संख्या में संवेदकों के करोड़ों रुपये के बिल अटके हुए हैं. इससे निर्माण कार्य प्रभावित होने के साथ संवेदकों पर बैंक की इएमआई और अन्य वित्तीय दायित्वों का दबाव बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल को खान विभाग के आदेश के बाद डबल रॉयल्टी भुगतान की व्यवस्था बंद कर दी गयी. इसके बाद मिट्टी और बालू के चालान उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है. स्थिति यह है कि पांच करोड़ रुपये के किसी बिल में महज 50 हजार रुपये की मिट्टी चालान की कमी होने पर पूरा भुगतान रुक जा रहा है. इस मामले में संवेदक प्रतिनिधिमंडल खान विभाग, मुख्य सचिव और पथ निर्माण विभाग के सचिव से मिल चुका है, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है.\\
एसओआर संशोधन का स्वागत
उन्होंने 31 अगस्त को एसओआर संशोधित करने के सरकार के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि पहले चार वर्ष पुराने दर पर निविदाएं निकल रही थीं, जबकि अब विकास कार्यों में वर्तमान बाजार दर के अनुरूप दर लागू होगी. उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के अभियंता प्रमुखों के प्रति आभार जताया.
सरकार से बिटुमिन की बढ़ी कीमत की प्रतिपूर्ति मांगी
संवेदकों ने पुराने और चल रहे ठेकों में बिटुमिन की बढ़ी कीमत की प्रतिपूर्ति की भी मांग की है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण बिटुमिन महंगा हुआ है. नयी निविदाओं में दर संशोधन संभव है, लेकिन पुराने अनुबंधों में संवेदकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. छोटी योजनाओं तथा ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग की कई योजनाओं में भी राहत की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भुगतान और बढ़ी लागत की समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो सड़क समेत अन्य विकास कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है. प्रेस वार्ता में नेशनल वाइस प्रेसिडेंट चंद्रकांत रायपत, संग्राम विजय सिंह, संजीव कुमार और झारखंड संवेदक संघ के अध्यक्ष अजय सिंह मौजूद थे.
