LPG Crisis: झारखंड की राजधानी रांची में भी घरेलू गैस की किल्लत देखने को मिल रही है. रेस्टोरेंट संचालक से लेकर आम लोग तक परेशान हैं. कई गैस एजेंसियों के दफ्तर के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ दिख रही है. लोग सिलिंडर लेने के लिए गैस एजेंसियों का चक्कर लगा रहे हैं. रांची में क्या सच में घरेलू गैस की किल्लत हो गई है, प्रभात खबर ने इसकी पड़ताल की. पाया गया कि रांची के रातू रोड स्थित इंडियन गैस एजेंसी के बाहर भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल है. पाया गया कि पिछले चार-पांच दिनों से बुकिंग नंबर और व्हाट्सएप बुकिंग काम नहीं कर रहा है.
एक गैस एजेंसी के संचालक मनोज कुमार ने जब गैस की किल्लत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सिस्टम बदल दिया गया है. पहले बुकिंग होते ही डीएसी (DAC) नंबर मिल जाता था और गैस मिल जाती थी, लेकिन अब 25 दिन का नियम लागू कर दिया गया है. यानी डिलीवरी के 25 दिन से पहले आप दूसरा सिलिंडर बुक नहीं कर पाएंगे. साथ ही, अब 80 फीसदी डीएसी नंबर अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके बिना डिलीवरी नहीं होगी.
मनोज कुमार से जब पूछा गया कि यह किल्लत अचानक क्यों बढ़ गई है? तब उन्होंने बताया कि इसके दो मुख्य कारण हैं – पहला, होली के बाद ड्राइवर अपने घर चले गए हैं, जिससे सप्लाई रुक-रुक कर आ रही है. दूसरा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान युद्ध की वजह से भी थोड़ी किल्लत बढ़ी है. अब महीने में दो-तीन सिलिंडर लेने वाला प्रावधान खत्म हो गया है, अब 25 दिन में सिर्फ एक ही गैस सिलिंडर मिलेगा.
उपभोक्ता परेशान
एक उपभोक्ता मुकेश कुमार ने कहा कि हम लोग पिछले 11 साल से इसी व्यवस्था में गैस ले रहे हैं, लेकिन ऐसी दिक्कत कभी नहीं आई. सुबह से फोन लगा रहे हैं, न व्हाट्सएप काम कर रहा है और न ही नंबर. अब तो केवाईसी (KYC) न होने की वजह से भी लोगों को वापस भेजा जा रहा है. एक महिला उपभोक्ता ने कहा कि पहले गाड़ी आती थी तो हम आसानी से गैस ले लेते थे, अब कह रहे हैं कि काउंटर पर जाकर बुकिंग कराओ. यह नया सिस्टम बहुत परेशान करने वाला है.
स्थिति सिर्फ एक एजेंसी तक सीमित नहीं है. एचपी गैस के उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें दो महीने से गैस नहीं मिल रही है और घर में खाना बनाना मुश्किल हो गया है. लोग कह रहे हैं कि बुकिंग करने पर एक महीने बाद का समय दिया जा रहा है. उपभोक्ताओं को ट्रांसफर कराने में भी समस्या आ रही है. एक उपभोक्ता ने कहा, ‘मेरी एजेंसी बदल दी गई है और पिछले चार दिन से घर में खाना नहीं बना है, हम बाहर का खाना खाने को मजबूर हैं.’
रेस्टोरेंट संचालकों को अलग परेशानी
इस संकट का असर अब रेस्टोरेंट्स पर भी पड़ रहा है क्योंकि कमर्शियल गैस की डिलीवरी पर रोक जैसी स्थिति बन गई है. प्रेस क्लब रेस्टोरेंट के शेफ राजू ने कहा कि अगर गैस नहीं मिलेगी तो रेस्टोरेंट बंद करना पड़ेगा. इससे हम जैसे रोज कमाने-खाने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा. अभी तो हालत यह है कि गोदामों में गैस ही नहीं है और लोग खाली सिलेंडर लेकर घूम रहे हैं. चाचा पराठा के संचालक अमित ने कहा, ‘हम पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं. अगर सिलेंडर नहीं मिला तो व्यवसाय बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं है. सरकार को हम जैसे दुकानदारों और हमारे स्टाफ के बारे में सोचना चाहिए.’
डिलीवरी मैन को करना पड़ रहा गुस्से का सामना
सबसे ज्यादा परेशानी डिलीवरी मैन को हो रही है. वे क्षेत्र में जाते हैं, जहां उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है. एक डिलीवरी मैन उपेंद्र ने कहा, जब हम फील्ड में जाते हैं, तो लोग 25 दिन की गैपिंग वाले नियम से बहुत नाराज होते हैं. हम उन्हें समझाते हैं कि कार्ड का कोटा पूरा होने तक इंतजार करना पड़ेगा या पड़ोसी से मदद लेनी पड़ेगी. सबसे बड़ी समस्या ऑनलाइन बुकिंग न होना है, जिसकी वजह से लोग पैनिक हो रहे हैं.
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