डॉ मयंक मुरारी की पुस्तक शून्य की झील में प्रेम का लोकार्पण

झारखंड के विचारक और लेखक मयंक मुरारी के काव्य संग्रह शून्य की झील में प्रेम का लोकार्पण शनिवार को प्रेस क्लब में हुआ.

रांची. झारखंड के विचारक और लेखक मयंक मुरारी के काव्य संग्रह शून्य की झील में प्रेम का लोकार्पण शनिवार को प्रेस क्लब में हुआ. कार्यक्रम का आयोजन साहित्यिक समूह ‘शब्दकार’ की ओर से किया गया. यह मयंक मुरारी की तीसरी काव्य पुस्तक है. लोकार्पण के अवसर पर मयंक मुरारी ने कहा कि काव्य मन से परे की अनुभूति है. प्रेम अगर कर्म से जुड़ जाये तो सृजन बनता है, और भक्ति से जुड़ जाये तो मुक्ति का मार्ग बनता है. मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा ने कहा कि इतिहास व्यक्ति के पद को नहीं, लेखन को याद रखता है. आने वाली पीढ़ी प्रेम पत्रों से अनभिज्ञ रहेगी, ऐसे समय में प्रेम कविताओं पर पुस्तक आना सुखद है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि कुमार वृजेंद्र ने कहा कि प्रेम साहित्य का सबसे पुरातन विषय है. नक्सलबाड़ी आंदोलन के बाद प्रेम पर लिखना जैसे वर्जित हो गया था. मयंक मुरारी ने प्रेम जैसे व्यापक विषय को चुनकर साहसिक कार्य किया है. प्रमोद कुमार झा ने कहा कि विश्व साहित्य में सबसे अधिक रचनाएं प्रेम पर ही लिखी गयी हैं. शब्दकार समूह की अध्यक्ष रश्मि शर्मा ने कहा कि जब चारों ओर घृणा का माहौल है, तब प्रेम कविताएं लिखना अत्यंत आवश्यक है. शून्य की झील में प्रेम को पढ़ते हुए हम अपने प्रेम को और ईश्वर को भी याद कर सकते हैं. लेखिका अनामिका प्रिया ने कहा कि मयंक मुरारी की कविताएं प्रकृति के साथ जुड़कर संवेदना के नए द्वार खोलती हैं. समीक्षक उर्वशी, सुरिंदर कौर नीलम, संगीता कुजारा टॉक, राकेश रमण, सोनल थेपड़ा सहित अन्य वक्ताओं ने भी पुस्तक पर अपने विचार रखे.

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Published by: Praveen

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