अब फसल बीमा के लिए किसान ID अनिवार्य, बिना ID नहीं मिलेगा लाभ - कागजी प्रक्रिया होगी पेपरलेस

फसल बीमा को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने किसान आईडी अनिवार्य कर दी है। अब किसानों को कागजी दस्तावेजों से मुक्ति मिलेगी और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगेगी।

मनोेज सिंह की रिपोर्ट

रांची. फसल बीमा की व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. अब फसल बीमा के लिए किसान आईडी को अनिवार्य किया जा रहा है. भारत सरकार के निदेशक (फसल बीमा) चंद्रजीत चटर्जी ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव, कृषि सचिव और कृषि निदेशकों को इसकी जानकारी दी है. कहा है कि किसान आईडी अनिवार्य होने का सबसे बड़ा फायदा वास्तविक किसानों को मिलने की उम्मीद है.

किसान की पहचान स्पष्ट

इसके माध्यम से किसान की पहचान को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा. इससे फसल बीमा में गलत तरीके से शामिल होने वाले या गलत पहचान के आधार पर बीमा कराने वाले लोगों को बाहर करने में मदद मिलेगी. व्यवस्था में किसान की पहचान स्पष्ट होने से बीमा प्रक्रिया की दक्षता भी बढ़ने की संभावना है. एग्रीस्टैक स्कीम के तहत किसानों का पहचान पत्र बनाया जा रहा है. इसमें एक-एक किसान की पूरी विवरणी उपलब्ध रहेगी.

कागजी प्रक्रिया होगी आसान

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वास्तविक किसानों को फसल बीमा कराने के लिए अलग-अलग कागजी दस्तावेज जुटाने की जरूरत नहीं होगी. किसान आईडी के आधार पर पंजीकरण को पेपरलेस बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है. इससे किसानों को बीमा के लिए आवेदन करते समय दस्तावेज तैयार करने और जमा करने की प्रक्रिया से राहत मिल सकती है.

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डिजिटल सेवाओं की नींव बनेगी किसान आइडी

किसान आईडी को केवल फसल बीमा तक सीमित व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जा रहा है. इससे कृषि क्षेत्र में डिजिटल सेवाओं के कई दूसरे उपयोग भी विकसित किए जा सकते हैं. संबंधित चर्चा में किसान आईडी को एग्रीस्टैक के लाइव उपयोग से जोड़ने की संभावना भी सामने आयी है. इससे किसान-केंद्रित डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है. किसान आइडी के माध्यम से भविष्य में किसान से संबंधित विभिन्न सेवाओं को एक डिजिटल पहचान से जोड़ने की संभावना बनती है. सेवाओं की अधिक लक्षित और पारदर्शी डिलीवरी की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बताया गया है.

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एफपीओ से जोड़ने की भी संभावना

किसान आइडी के उपयोग को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के डेटाबेस से जोड़ने की संभावना पर भी चर्चा हुई है. इससे एफपीओ के स्तर पर किसान संबंधी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और आगे विभिन्न डिजिटल उपयोगों को सक्रिय करने में मदद मिल सकती है.


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