JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने से बेरोजगार हुए कर्मचारी, किसी ने DRDO तो किसी ने रेलवे की नौकरी छोड़ी

JSSC CGL नियुक्ति रद्द होने के बाद हज़ारों कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. कईयों ने सरकारी नौकरी छोड़कर इस परीक्षा को चुना था, जो अब सड़कों पर आ गए हैं. कर्मचारियों ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है, यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है.

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

JSSC CGL की नियुक्ति रद्द किये जाने के बाद कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के फैसले से उनके सामने रोजगार और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने बताया कि उन्हें अब तक नियुक्ति रद्द किये जाने की लिखित सूचना नहीं दी गयी है. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि JSSC CGL के जरिये नियुक्त होने वालों में बड़ी संख्या ऐसे अभ्यर्थियों की थी, जो पहले से कहीं न कहीं नौकरी कर रहे थे. किसी के पास केंद्र सरकार की नौकरी थी, कोई रेलवे में कार्यरत था, तो कोई दूसरे राज्यों में सरकारी नौकरी कर रहा था.

हजारीबाग के मो. तौफिक ने DRDO की नौकरी छोड़ CGL को चुना

हजारीबाग के मो. तौफिक ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग कुल 10 परीक्षाएं पास कीं, लेकिन जब झारखंड में CGL की बहाली आयी तो सभी नौकरियों को छोड़कर वो सीजीएल की परीक्षा दिये और उसमें उन्होंने सफलता हासिल की. तौफिक ने आगे बताया कि वर्ष 2018 में DRDO में काम करने के बाद पंचायत सचिव और एनटीपीसी में भी उनका चयन हुआ. भुवनेश्वर में एसएससी सीजीएल के जरिये एएओं के पद पर कार्यरत थे लेकिन उन्होंने गृह राज्य में नौकरी की चाह में JSSC CGL को चुना. दिन में नौकरी और रात में तैयारी की, लेकिन नियुक्ति रद्द होने के बाद अब वे बेरोजगार हो गए.

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कर्मचारियों ने नियुक्ति रद्द होने के बाद अनशन की दी चेतावनी

प्रभात खबर से बातचीत में कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर नौकरी हासिल की थी. वर्षों तक संघर्ष करने के बाद उन्हें नियुक्ति मिली थी. ऐसे में सरकार एक रात में कैसे उनकी नौकरी छीन सकती है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती है, तो वे आमरण अनशन करेंगे. उन्होंने कहा कि JSSC CGL की प्रक्रिया का विज्ञापन वर्ष 2015 में निकला था. इसके बाद विवाद और कानूनी लड़ाई का लंबा दौर चला. सितंबर 2024 में परीक्षा ली गई. सालों से विवादों में रही इस नियुक्ति प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार की और से नियुक्ति की गयी.

गोड्डा के ऋषिकेश ने चार नौकरी छोड़ JSSC CGL को चुना

गोड्डा के ऋषिकेश सज्जन ने बताया कि वह केंद्र सरकार के सांख्यिकी विभाग में कार्यरत थे. मध्यप्रदेश के खंडरा में पदस्थापित थे. चार-चार प्रतियोगी परीक्षा में सफल हुए हैं. नौकरी भी मिली. पर झारखंड का मोह नहीं छूटा. हमेशा झारखंड की याद सताती थी. उन्होंने कहा कि जब लंबे संघर्ष के बाद JSSC CGL के जरिये नौकरी मिली, तो लगा कि उनकी मेहनत सफल हो गयी लेकिन, नियुक्ति रद्द होने के बाद अब उनके पास कोई नौकरी नहीं है. एक ही झटके में बेरोजगार हो गये.

चतरा के संजीत कुमार ने रेलवे की नौकरी छोड़ JSSC CGL को चुना

इटखोरी (चतरा) के संजीत कुमार गुवाहाटी में रेलवे में कार्यरत थे. अपने राज्य में नौकरी करने की चाह में जेएसएससी सीजीएल में शामिल हुए. खूब मेहनत की और सफल भी हुए. लगा कि अब अपने परिवार के साथ रह सकते हैं. 2017 से ही सीजीएल की तैयारी कर रहे थे. काफी संघर्ष के बाद यह नौकरी मिली. अब फिर से सड़क पर आ गये हैं.

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By प्रतीक्षा कुमारी

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