JPSC Student Protest: सरकार-छात्र के बीच 5 घंटे की माथापच्ची में भी नहीं निकला समाधान, 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव तय

रांची से JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों और राज्य सरकार के बीच दूसरी दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही. 98% मांगों पर सहमति के सरकारी दावे के बावजूद, छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की चेतावनी दे रहे हैं. प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है.


रांची से नवीन शर्मा, अभिषेक आनंद और राजलक्ष्मी की रिपोर्ट

JPSC Student Protest: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और राज्य सरकार के बीच रविवार को दूसरी दौर की वार्ता हुई. करीब दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई. सरकार और छात्रों के बीच करीब पांच घंटे तक चली बातचीत में कोई समाधान नहीं निकल पाया है. हालांकि, सरकार मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि छात्रों की करीब 98% मांगों पर सहमति बन गई है. वहीं, छात्रों का कहना है कि 50% से अधिक मांगों को सरकार ने स्वीकार किया है, लेकिन कई प्रमुख और निर्णायक मुद्दों पर अब भी सहमति नहीं बन पाई है. बैठक के बाद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया. छात्र प्रतिनिधियों ने ऐलान किया कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा. ऐसे में दूसरी वार्ता के बाद भी आंदोलन का समाधान नहीं निकल सका है.

14वीं JPSC परीक्षा की जांच पर सरकार ने लिया फैसला

14वीं JPSC परीक्षा को लेकर बैठक में सरकार ने जांच कराने पर सहमति जताई. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के मुताबिक, मामले की जांच ED और CID करेगी. सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि CID को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने के लिए कहा जाएगा. छात्रों की ओर से 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग भी रखी गई. इस पर सरकार ने तत्काल परीक्षा रद्द करने के बजाय इस पर विचार करने की बात कही है. यानी जांच के मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच सहमति की स्थिति बनी, लेकिन परीक्षा रद्द करने का फैसला अभी लंबित है.

90 दिनों में चार्जशीट, बनेगा फास्ट ट्रैक कोर्ट

मंसुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर तीन दिनों की बातचीत के बाद 14वीं JPSC और 2023-25 की बैकलॉग नियुक्तियों में हुई अनियमितताओं पर कार्रवाई का फैसला लिया गया है. आपराधिक पहलुओं की जांच CID करेगी, जबकि वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन को देखते हुए ED से भी जांच का अनुरोध किया जाएगा. फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जहां मामले की तेजी से सुनवाई होगी. मंत्री ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे जांच और कार्रवाई दोनों में तेजी आएगी. जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. सरकार का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करना है.

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति

सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार के लिए IIT-ISM, IIM रांची और XLRI के विशेषज्ञों वाली समिति गठित करने की बात कही है. समिति परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने और जरूरी सुधारों पर मार्गदर्शन देगी. बैठक के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने CGL परीक्षा रद्द करने की मांग रखी. छात्रों का कहना है कि परीक्षा को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर इसे रद्द किया जाना चाहिए. सरकार ने स्पष्ट किया कि CGL परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आयोजित हुई है और फिलहाल मामला दोनों अदालतों की निगरानी में है. इसलिए सरकार के पास परीक्षा रद्द करने का अधिकार नहीं है.

JSSC CGL पर नहीं बनी सहमति, CBI जांच पर अड़े छात्र

JSSC CGL परीक्षा को लेकर वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण गतिरोध सामने आया. छात्रों ने इस मामले की CBI जांच कराने की मांग रखी, जबकि सरकार की ओर से न्यायिक जांच की बात कही गई. सरकार का तर्क है कि CGL परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आयोजित हुई है. इसलिए इसे सीधे रद्द नहीं किया जा सकता. वहीं, छात्र परीक्षा की प्रक्रिया और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग पर कायम हैं. यही मुद्दा बैठक के दौरान सरकार और छात्रों के बीच असहमति का प्रमुख कारण बना रहा. छात्रों का कहना है कि केवल न्यायिक जांच का आश्वासन उनकी मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है और वे CBI जांच चाहते हैं.

TDPL की सभी परीक्षाएं रद्द करने की मांग पर गतिरोध

TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं को लेकर भी सरकार और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन सकी. छात्रों ने TDPL की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग रखी है. छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर इन परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है. वहीं, सरकार की ओर से सभी परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति नहीं दी गई है. TDPL को लेकर छात्रों की मांग और सरकार के रुख में अंतर के कारण यह मुद्दा भी वार्ता में लंबित रहा. छात्रों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा.

परीक्षा व्यवस्था में रिफॉर्म पर सरकार-छात्र में सहमति

बैठक में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार यानी रिफॉर्म को लेकर सरकार और छात्रों के बीच सहमति बनी है. छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC और JSSC की परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए संस्थागत सुधार शामिल हैं. सरकार की ओर से पहले ही संकेत दिया गया था कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जाएगी. इसमें IIT, XISS और ISM जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ बुद्धिजीवियों को भी शामिल करने की बात कही गई है. प्रस्तावित कमेटी छात्रों से भी विमर्श करेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की बात कही गई है. इस मुद्दे पर सरकार की सहमति को वार्ता में बड़ी प्रगति माना जा रहा है. हालांकि छात्रों के लिए परीक्षा रद्द करने और जांच एजेंसी जैसे मुद्दे अभी ज्यादा महत्वपूर्ण बने हुए हैं.

सरकार का दावा, 98 फीसदी मांगें मानीं

बैठक के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने दावा किया कि सरकार ने छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगों को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और आंदोलन खत्म कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वार्ता के दौरान अधिकतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया गया है. लेकिन छात्रों के आकलन में तस्वीर अलग है. छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी 50 फीसदी से अधिक मांगों पर सहमति बनी है, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगें अभी भी लंबित हैं. इस तरह दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर है. सरकार जहां लगभग पूरी मांगें मानने की बात कर रही है, वहीं छात्र इसे आंदोलन समाप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं मान रहे हैं.

प्रमुख मुद्दों पर फैसला नहीं होने से छात्र नाराज

छात्रों के मुताबिक 14वीं JPSC की परीक्षा रद्द करने, JSSC CGL में CBI जांच और TDPL की सभी परीक्षाओं को रद्द करने जैसे मुद्दे अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं. यही वे मुद्दे हैं जिन्हें छात्र आंदोलन के केंद्र में मान रहे हैं. छात्रों का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर सहमति अपनी जगह है, लेकिन पुराने मामलों में जिम्मेदारी तय करना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना भी जरूरी है. जब तक इन मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, आंदोलन खत्म करना संभव नहीं है.

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10 अगस्त को विधानसभा घेराव

दूसरी दौर की वार्ता के बाद भी अंतिम सहमति नहीं बनने पर छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है. छात्र प्रतिनिधियों ने घोषणा की है कि 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा. सोमवार को होने वाले विधानसभा घेराव को लेकर राजधानी रांची में प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी. बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की संभावना के बीच सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल, सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी आंदोलन को समाप्त कराने में सफल नहीं हुआ है. सरकार कुछ मुद्दों पर सहमति बनने को बड़ी उपलब्धि बता रही है, जबकि छात्र जांच एजेंसी और परीक्षा रद्द करने जैसे मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं. अब नजर 10 अगस्त के विधानसभा घेराव और उसके बाद सरकार के अगले कदम पर रहेगी.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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