अनगड़ा से जितेन्द्र कुमार की रिपोर्ट
Jonha Shri Ram Katha: झारखंड के रांची जिले के जोन्हा स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला. कथा के दौरान राम वनवास और किष्किन्धा कांड के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को गहराई से भावुक कर दिया. पंडाल में मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल पूरी तरह भक्तिमय बन गया.
राम वनवास सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
कथा व्यास आचार्य धर्मराज शास्त्री ने अयोध्या कांड के तहत जब भगवान श्रीराम के वनवास का प्रसंग सुनाया, तो श्रोताओं के हृदय में गहरी संवेदना उमड़ पड़ी. उन्होंने शबरी और केवट प्रसंग को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे. कथा के दौरान कई लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए और पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया.
किष्किन्धा कांड ने बांधा समा
इसके बाद किष्किन्धा कांड का सजीव वर्णन किया गया, जिसमें भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रथम मिलन का प्रसंग प्रमुख आकर्षण रहा. आचार्य ने बताया कि कैसे हनुमान जी ने ब्राह्मण वेश में राम-लक्ष्मण की परीक्षा ली. इस रोचक प्रसंग ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. साथ ही सुग्रीव से मित्रता और बालि वध का वर्णन भी अत्यंत प्रभावशाली रहा.
कथा से मिली जीवन की सीख
आचार्य धर्मराज शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीराम का चरित्र केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की प्रेरणा है. उन्होंने बताया कि राम हमें त्याग, प्रेम, सच्ची मित्रता और कर्तव्य पालन की सीख देते हैं. उन्होंने कहा कि हर युग में भगवान श्रीराम जैसे आदर्श और हनुमान जी जैसे भक्त की प्रासंगिकता बनी रहेगी.
गणमान्य अतिथियों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में कई प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति रही. इसमें पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो, जिला परिषद अध्यक्ष निर्मला भगत समेत कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं. सभी ने कथा आयोजन की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया.
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आयोजन में दिखा सामूहिक सहयोग
इस धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में स्थानीय लोगों का बड़ा योगदान रहा. आयोजन समिति के अध्यक्ष बलराम साहू और संयोजक संतोष साहू समेत कई लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई. बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए, जिससे यह कार्यक्रम भव्य और सफल बन सका.
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