रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट
रांची: खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में झामुमो ने केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि विधेयक झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों के अधिकारों और विकास को प्रभावित करेगा. उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि झारखंड को 1980 के दशक जैसा आंदोलन करने के लिए मजबूर न किया जाये. जरूरत पड़ी तो आर्थिक नाकेबंदी की जायेगी और झारखंड से एक ढेला भी खनिज बाहर नहीं जाने दिया जाएगा.
15 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
विनोद पांडेय ने दावा किया कि विधेयक से झारखंड को सीधे करीब 15 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को उसके पुराने बकाये के करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है. इसका असर राज्य में चल रही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी पड़ेगा. उन्होंने कहा कि मईंया सम्मान योजना, अबुआ आवास और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं.
उन्होंने कहा कि झामुमो खनन या उद्योगों में निवेश के खिलाफ नहीं है, लेकिन झारखंड के अधिकारों और खनिज संपदा पर राज्य के हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. पार्टी इस विधेयक के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन करेगी. इसमें जन-जागरण, धरना-प्रदर्शन और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आर्थिक नाकेबंदी शामिल होगी.
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
पांडेय ने कहा कि झामुमो इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेगा. इसके अलावा पार्टी कानूनी रास्ता भी अपनायेगी. उन्होंने सवाल उठाया कि विधेयक से प्रभावित होने वाले झारखंड, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों से क्या औपचारिक परामर्श किया गया है. खनन प्रभावित राज्यों पर इसके आर्थिक असर का कोई विस्तृत अध्ययन कराया गया है या नहीं, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए.
छात्रों के आंदोलन पर भी बोले विनोद पांडेय
झामुमो महासचिव ने राज्य में चल रहे छात्रों के आंदोलन को लेकर कहा कि पार्टी छात्रों के साथ है और सरकार संवाद के जरिए समस्या का समाधान चाहती है. उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे बातचीत के लिए 24 घंटे खुले हैं. जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री खुद छात्रों से संवाद करेंगे. हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने और उन्हें दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा न बनें और संवाद का रास्ता अपनायें.
