Jharkhand Weather Alert: झारखंड में 16 से 19 सितंबर तक गरज के साथ बारिश, फसलों को ऐसे बचाएं किसान

झारखंड में 15 से 19 सितंबर तक गरज के साथ बारिश होने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों के लिए एक विशेष मौसम बुलेटिन जारी किया है. इसमें फसलों की सुरक्षा और जरूरी सलाह दी गई है.


Jharkhand Weather Alert: झारखंड में 15 से 19 सितंबर तक गरज के साथ बारिश होने के आसार हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मौसम केंद्र रांची ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सहयोग से झारखंड के किसानों के लिए ग्रामीण कृषि मौसम सेवा बुलेटिन जारी किया है. बुलेटिन के अनुसार 15 से 19 सितंबर तक राज्य में कई जगह हल्की से मध्यम बारिश, मेघगर्जन, वज्रपात और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है. मौसम विभाग ने किसानों से फसलों की सुरक्षा, जल निकासी और खेतों में अनावश्यक कृषि कार्य टालने की सलाह दी है.

पांच दिन तक ऐसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों तक झारखंड में आमतौर पर आसमान में बादल छाए रहेंगे. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बारिश होने की संभावना है. अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, जबकि 15 से 19 सितंबर तक वज्रपात और तेज हवाओं का खतरा बना रहेगा.

धान के किसानों को क्या करना चाहिए

धान की रोपाई वाली फसल में पानी भरने से पोषक तत्वों की हानि और रोग बढ़ने का खतरा रहता है. मौसम विभाग ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने, मेड़ों को मजबूत रखने और फिलहाल यूरिया की टॉप ड्रेसिंग टालने की सलाह दी है. कल्ले निकलने से लेकर दूध भरने की अवस्था वाली फसल में गांधी कीट, तना छेदक और ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) पर लगातार नजर रखने को कहा गया है.

मक्का और अरहर में रखें विशेष सावधानी

मक्का के खेतों में जलजमाव से जड़ सड़ने और पौधों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है. किसानों को तुरंत जल निकासी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है. वहीं अरहर में उकठा रोग के लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पौधों को उखाड़कर हटाने और अगली बुवाई में बीज उपचार व रोगरोधी किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है. मक्का में भुट्टा बनने की अवस्था पर पक्षियों से बचाव के लिए खेतों में चमकीली पट्टी बांधने की भी सलाह दी गई है.

सब्जी उत्पादकों के लिए एडवाइजरी

बारिश के दौरान सब्जियों में जलजमाव, जड़ सड़न और फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है. मौसम विभाग ने खेतों में जल निकासी बनाए रखने, कमजोर पौधों को सहारा देने और बारिश के दौरान कीटनाशक या फफूंदनाशी का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी है. मिर्च और बैंगन में फल सड़न दिखाई देने पर साफ मौसम में कार्बेन्डाजिम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करने की सलाह दी गई है.

जल्दी आलू लगाने वाले किसान करें तैयारी

जो किसान अगात आलू की खेती करना चाहते हैं, उन्हें अभी से बेहतर बीज और उर्वरकों की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है. विभाग ने कुफरी अशोका और कुफरी पुखराज किस्मों की सिफारिश की है. एक एकड़ में बुवाई के लिए 12 क्विंटल बीज, 40 किलो यूरिया, 70 किलो डीएपी, 80 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश और 10 किलो गंधक की जरूरत बताई गई है. बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी जरूरी बताया गया है.

पशुपालकों और मत्स्यपालकों के लिए जरूरी सलाह

गरज-चमक और बारिश के दौरान मवेशियों को खुले में नहीं छोड़ने और उन्हें सुरक्षित व ढकी हुई जगह पर रखने की सलाह दी गई है. बाबेसियोसिस रोग के लक्षण दिखने पर पशु चिकित्सक से परामर्श लेकर उपचार कराने को कहा गया है. वहीं मत्स्यपालकों को तालाब में मछलियों के लिए सरसों की खली और चावल के कुंडे को बराबर मात्रा में मिलाकर कृत्रिम आहार देने की सलाह दी गई है.

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खेतों में अभी टालें ये काम

मौसम विभाग ने किसानों से अगले कुछ दिनों तक उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्य बारिश को देखते हुए स्थगित रखने को कहा है. साथ ही सफेद मक्खी और रस चूसने वाले कीटों की नियमित निगरानी करने तथा वर्षा जल संचयन के लिए खेतों में डोबा जैसी संरचनाएं विकसित करने की सलाह दी गई है. वज्रपात के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने, खुले मैदान, जलाशयों और बिजली के खंभों के पास जाने से भी बचने को कहा गया है.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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