Jharkhand Vidhan Sabha Special Session: हेमंत सोरेन ने विपक्ष को राज्य को बर्बाद करने वाला गिरोह बताया

Jharkhand Vidhan Sabha Special Session: बाहरी लोगों की वजह से आदिवासियों पर पड़ा नकारात्मक प्रभाव. झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार स्थानीयता के लिए 1932 के खतियान को लागू करने और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी आरक्षण देने संबंधी प्रस्ताव को आज विधानसभा में पारित करवाने जा रही है. विधानसभा के विशेष सत्र की हर अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ…

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6:48 PM. 11 Nov 22 1:18 PM. 11 Nov

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया जवाब

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार की मंशा बिल्कुल स्पष्ट है. इस विषय पर सरकार काम कर रही है. इन लोगों ने पहले एक मांग रखी थी. उसमें स्पष्ट था कि पिछली सरकार ने जो 1985 का कटऑफ डेट रखा था. उसी को फिर से लाने का प्रयास किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े पैमाने पर नियुक्तियां होंगी.

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डॉ लंबोदर महतो ने दिया ये संशोधन

डॉ लंबोदर महतो ने कहा कि जिले का अंतिम सर्वे या खतियानधारी को भी बिल में जोड़ा जाये. पश्चिमी सिंहभूम में 1913 से 1919 तक सर्वे हुआ. कई जिलों में 1927 से 1935 का सर्वे उपलब्ध है. पूर्वी सिंहभूम 1934 से 1938 तक के ही दस्तावेज उपलब्ध हैं. डॉ लंबोदर महतो ने कहा है कि वह 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति का समर्थन करते हैं, लेकिन इसमें कुछ संशोधन की जरूरत है.

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ये राज्य को बर्बाद करने वाला गिरोह है- विधानसभा में बोले हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सिर्फ सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि अन्य सभी रोजगार से भी इसे हम जोड़ेंगे. हमने सीमित दायरा नहीं बनाया है. इसका दायरा बहुत बड़ा रखा है. उन्होंने कहा कि अमित यादव, रामचंद्र चंद्रवंशी और विनोद सिंह की जो आशंका है, वह निर्मूल है. हमारी सरकार पूरी तरह से पारदर्शी सरकार है. आपलोगों की तरह लोगों को ठगने या छलने का काम हम नहीं करते. आप उदाहरण देख रहे हैं. इतनी नियुक्तियां निकल रही हैं, कभी विवाद हुआ. आपके तो सारे मामले कोर्ट में लटक जाते हैं. उन्होंने कहा कि ये लोग षड्यंत्र करते हैं. ये राज्य को बर्बाद करने वाला गिरोह है. इस मामले को प्रवर समिति को भेजने की कोई जरूरत नहीं है.

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जल्दबाजी में लाया गया है विधेयक

रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि सरकार ने इस बिल को जल्दबाजी में पेश किया है. इसे प्रवर समिति को सौंपना चाहिए, ताकि बाद में इसमें कोई कानूनी विवाद न हो. कानूनविदों से सरकार को सुझाव लेना चाहिए था. उन्होंने कहा कि 2016 में रघुवर दास के कार्यकाल में बिल लाया गया था. हम इस बिल के समर्थन में हैं, लेकिन उसमें कुछ संशोधन की जरूरत है.

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बिल के नाम में स्थानीयता के साथ नियोजन को भी जोड़ा जाये

विनोद सिंह ने कहा कि 15 नवंबर को झारखंड के 22 साल हो जायेंगे. भौगोलिक और प्रशासनिक स्तर पर तो राज्य का विकास हुआ, लेकिन सांस्कृतिक रूप में विकास नहीं हुआ. उन्होंने विधेयक का समर्थन किया. कहा कि विधेयक पारित हो जाने से कुछ नहीं होने वाला है. स्थानीयता नीति का नाम स्पष्ट हो. स्थानीयता और नियोजन की बात स्पष्ट की जाये. स्थानीयता की बात नियोजन से जुड़ी है. यह सिर्फ एक ऑर्नामेंट न रह जाये. नियोजन में प्राथमिकता मिलेगी, इसको इसमें जोड़ा जाये. राज्य के स्थानीय निवासियों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में स्थानीयता को आधार माना जायेगा.

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अमित यादव ने अपने संशोधन में दिये सुझाव

अमित यादव ने कहा कि कोई भी वार्ड पार्षद या मुखिया आम सभा के माध्यम से किसी व्यक्ति को झारखंडी प्रमाणित कर दे, तो क्या सरकार उसे स्थानीय मान लेगी. उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का खतियान नहीं है, उसे स्वअभिप्रमाणित शपथ पत्र दिया जाना चाहिए. उसे मुखिया की ओर से प्रमाणित करना चाहिए. इसके बाद इसकी जांच की जाये और तब लोगों को स्थानीय का दर्जा दिया जाये. उन्होंने सुझाव दिया कि 1932 का खतियान जिन लोगों के पास नहीं है, वे अपना वंशावली दें. मुखिया उसे अभिप्रमाणित करे और बीडीओ उसकी जांच के बाद उसे स्थानीय का दर्जा दें. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो साहिबगंज जैसे जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खतियान बहुत आसानी से तैयार हो जायेंगे और प्रदेश के लोगों की समस्या बढ़ती जायेगी.

मुख्य बातें

Jharkhand Vidhan Sabha Special Session: बाहरी लोगों की वजह से आदिवासियों पर पड़ा नकारात्मक प्रभाव. झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार स्थानीयता के लिए 1932 के खतियान को लागू करने और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी आरक्षण देने संबंधी प्रस्ताव को आज विधानसभा में पारित करवाने जा रही है. विधानसभा के विशेष सत्र की हर अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ…

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Published by: Mithilesh jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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