रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट
Jharkhand Teacher Scam, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 (PGT/TGT) से जुड़े नियुक्ति विवाद पर कड़ा रुख अपनाया है. शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों में बड़ी विसंगति (अंतर) पाए जाने पर तीखे सवाल उठाए. उन्होंने सरकार से इस पर लिखित जवाब मांगा है.
शपथ पत्रों में नियुक्तियों की संख्या भिन्न क्यों?
सुनवाई के क्रम में राज्य सरकार की ओर से नियुक्त अभ्यर्थियों का एक विस्तृत डेटा शपथ पत्र के माध्यम से कमीशन के समक्ष प्रस्तुत किया गया. जब आयोग ने इस डेटा का बारीकी से अवलोकन किया, तो सरकारी आंकड़ों में ही बड़ा विरोधाभास सामने आया. ताजा आंकड़ों के अनुसार सरकार के नए शपथ पत्र में 12,739 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का उल्लेख किया गया है. जबकि झारखंड हाईकोर्ट में पहले दायर किए गए शपथ पत्र में यह संख्या केवल 12,046 बताई गई थी. 693 अभ्यर्थियों के अंतर पर गंभीर आपत्ति जताते हुए जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि दोनों आंकड़ों में यह भिन्नता क्यों है? कमीशन ने सरकार से पूछा है कि क्या मूल सूची के बाद में कोई अतिरिक्त नियुक्तियां की गईं या फिर सरकारी आंकड़ों में कोई बड़ी मानवीय त्रुटि है.
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प्रार्थी पक्ष को बिंदुवार लिखित आपत्ति दर्ज कराने का निर्देश
कमीशन ने इस विसंगति को देखते हुए प्रार्थी (याचिकाकर्ता) के अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वे सरकार द्वारा प्रस्तुत नए शपथ पत्र और डेटा का गहन अध्ययन करें. इसके बाद वे इस डेटा के आधार पर अपनी बिंदुवार लिखित आपत्ति (Written Objection) आयोग के समक्ष दाखिल करें. मामले की गंभीरता को देखते हुए कमीशन ने अगली सुनवाई की तिथि 30 मई 2026 निर्धारित की है. गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में आयोग ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया था कि वह 2016 की इस नियुक्ति परीक्षा की पूरी स्टेट मेरिट लिस्ट, चयनित अभ्यर्थियों के नाम, उनके मार्क्स (Marks) और नियुक्ति तिथि सहित सभी आवश्यक और गोपनीय दस्तावेज प्रस्तुत करें.
कैसे हुआ था फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन?
यह पूरा विवाद मीना कुमारी व अन्य द्वारा दायर याचिका (जिसमें कुल 257 मामले शामिल हैं) से जुड़ा है. झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया था. हाईकोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपे.
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