Jharkhand News: झारखंड राज्य राजस्व उप निरीक्षक संघ की राज्य स्तरीय बैठक रविवार को शहर अंचल परिसर में आयोजित हुई. बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से 100 से अधिक राजस्व उप निरीक्षक शामिल हुए. बैठक में पहले लिए गए निर्णयों की समीक्षा की गई और लंबित मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई. संघ ने साफ कहा कि यदि दो महीने के भीतर सरकार उनकी मांगों पर फैसला नहीं लेती है तो राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा और राजस्व कार्य ठप कर दिए जाएंगे.
कई जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव
बैठक में गिरिडीह से इंद्रदेव, पलामू से खिरोधर रविदास, लोहरदगा से विकास सोनी, कोडरमा से उमेश कुमार, लातेहार से तनवीर, पूर्वी सिंहभूम से विष्णु कुमार, खूंटी से सुकेश रंजन, सरायकेला से मुरारी महतो, चतरा से चंद्रदीप गांधी, साहिबगंज से ऋषितोष झा, गढ़वा से दिवाकर सिंह, पश्चिमी सिंहभूम से प्रदीप बालमुचू, रामगढ़ से आनंद पांडे और रांची से सुनील सिंह समेत कई प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे. बैठक में संघ के मुख्य संरक्षक भारत कुमार सिंहा, अध्यक्ष अमर किशोर प्रसाद सिंहा, महामंत्री दुर्गेश मुंडा, संयुक्त मंत्री रविंद्र प्रसाद, महावीर प्रसाद और कोषाध्यक्ष संजय साहू ने भी संगठन की भावी रणनीति पर विचार साझा किए.
सम्मेलन के लिए स्वागत समिति बनी
बैठक में सर्वसम्मति से आगामी राज्य सम्मेलन के लिए स्वागत समिति का गठन किया गया. समिति में गढ़वा के दिवाकर सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है. साहिबगंज के ऋषितोष झा को उपाध्यक्ष, चतरा के चंद्रदीप गांधी को महामंत्री, खूंटी के सुकेश रंजन को संयुक्त मंत्री और रवींद्र शुक्ला को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई.
सरकार के सामने रखी जाएंगी आठ प्रमुख मांगें
राजस्व उप निरीक्षक संघ ने सरकार के समक्ष आठ प्रमुख मांगें रखने का फैसला किया. इनमें सबसे प्रमुख वेतन विसंगति दूर करने की मांग है. इसके अलावा मूल वेतन पर 2400 रुपये ग्रेड पे देने, तीन वर्ष बाद 2800 रुपये और दस वर्ष बाद 4200 रुपये ग्रेड पे लागू करने की मांग की गई. संघ ने राजस्व उप निरीक्षक से अंचल निरीक्षक के पद पर प्रोन्नति सुनिश्चित करने, सीमित विभागीय परीक्षा की अवधि पांच वर्ष करने और राजस्व प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की भी मांग उठाई है. साथ ही जिला स्तर के वरीय अधिकारियों द्वारा राजस्व उप निरीक्षकों के कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है.
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दो महीने की मोहलत, फिर आंदोलन
बैठक के अंत में संघ ने सरकार को दो महीने का समय देने का फैसला किया. संघ का कहना है कि यदि तय अवधि के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा. संघ ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में पूरे राज्य में राजस्व कार्य ठप कर दिए जाएंगे और इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. मुख्य संरक्षक भारत कुमार सिंहा और महामंत्री दुर्गेश मुंडा ने कहा कि संगठन पहले संवाद के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन ही अगला रास्ता होगा.
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