Jharkhand Politics News, रांची: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर आदिवासी अस्मिता और धार्मिक पहचान के मुद्दे पर सियासत गर्म हो गई है. प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर आदिवासी समुदायों की अनदेखी और ‘दोहरी राजनीति’ करने का आरोप लगाया. कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने प्रेस वार्ता में कहा कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आदिवासी समाज पर दोहरी सियासत करने में लगी है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलेश केशव महतो, पूर्व मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव, लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव और विधायक राजेश कश्यप जैसे बड़े चेहरे एक साथ मंच पर मौजूद रहे.
दिल्ली में होने वाले समागम पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने आगामी 24 मई को दिल्ली में आयोजित होने वाले एक बड़े कार्यक्रम को लेकर बीजेपी और संघ को घेरा. उन्होंने कहा कि दिल्ली में आरएसएस और बीजेपी समर्थित ‘आदिवासी जनजातीय सुरक्षा मंच’ द्वारा एक बड़ा समागम किया जा रहा है, जिसमें देश भर के आदिवासियों को जुटाने का दावा है. कांग्रेस ने इस पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जिन संगठनों और विचारधाराओं ने हमेशा आदिवासियों के मूल अधिकारों, उनके ‘जल-जंगल-जमीन’ और उनकी विशिष्ट पहचान का विरोध किया है, वे आज अचानक आदिवासियों के सबसे बड़े हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं. नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेपी आदिवासी समाज को सिर्फ और सिर्फ चुनावी वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती आई है.
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‘सरना धर्म कोड’ पर केंद्र की चुप्पी क्यों?- कांग्रेस की दो टूक
प्रेस वार्ता के दौरान सभी कांग्रेस नेताओं ने एक सुर में बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए सीधे केंद्र सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी और आरएसएस के मन में वास्तव में आदिवासी समाज के प्रति कोई हमदर्दी या चिंता है, तो केंद्र सरकार अब तक ‘सरना धर्म कोड’ को मंजूरी क्यों नहीं दे रही है? झारखंड विधानसभा से सर्वसम्मति से सरना धर्म कोड का प्रस्ताव पारित कर बहुत पहले ही केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है, लेकिन केंद्र इस फाइल को दबाकर बैठा है.
मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की हो रही है कोशिश
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि देश और झारखंड का आदिवासी समाज आज अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक अस्तित्व को बचाने की जमीनी लड़ाई लड़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी दिल्ली में समागम जैसे आयोजन करके आदिवासियों के इस मूल मुद्दे से देश का ध्यान भटकाने की साजिश रच रही है. नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज अब जागरूक हो चुका है, वह सब कुछ देख और समझ रहा है और आने वाले चुनावों में इस दोहरी नीति का कड़ा राजनीतिक जवाब देगा.
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