'अमीरों को राहत, किसान-छात्रों पर सख्ती क्यों?', कॉर्पोरेट कर्ज निपटारे पर कांग्रेस का केंद्र पर हमला

कांग्रेस नेता डॉ राजीव नारायण प्रसाद ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े कॉरपोरेट घरानों को भारी कर्ज राहत दी जा रही है, जबकि आम नागरिक, किसान और छात्र EMI के दबाव में हैं.

रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया पैनलिस्ट डॉ राजीव नारायण प्रसाद ने केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों और बैंकिंग प्रणाली पर करारा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कर्ज और आर्थिक राहत को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं. एक तरफ देश का आम नागरिक, किसान, विद्यार्थी और छोटा कारोबारी कर्ज की किस्त (EMI) चुकाने के लिए दबाव झेल रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़े कॉरपोरेट घरानों को ऋण समाधान के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की भारी छूट दी जा रही है.

22,000 करोड़ के कर्ज निपटारे पर उठाए गंभीर सवाल

डॉ राजीव नारायण प्रसाद ने सुभाष चंद्रा से जुड़े कारोबारी ऋण मामले का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 22,000 करोड़ रुपये की कुल देनदारी के मुकाबले बेहद कम राशि में समझौता किए जाने की प्रक्रिया से गंभीर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने सवाल किया कि यदि बड़े उद्योगपतियों के हजारों करोड़ के कर्ज में इतनी बड़ी राहत दी जा सकती है, तो देश के आम आदमी, किसान और पढ़ाई के लिए लोन लेने वाले छात्रों के लिए बैंकिंग नियम इतने कठोर और निर्दयी क्यों बनाए गए हैं?

ये भी पढ़ें: ऑनलाइन पोर्टल में दिक्कत होने पर भी बनेगा कास्ट-रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट, 3 महीने तक जमा कर सकते हैं ऑफलाइन आवेदन

शिक्षा और कृषि ऋण की वसूली पर सरकार से जवाब तलब

कांग्रेस नेता ने कहा कि विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लेते हैं और नौकरी न मिलने या विषम आर्थिक स्थितियों में किस्त न चुका पाने पर उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया जाता है. इसी प्रकार, प्राकृतिक आपदा या फसल की सही कीमत न मिलने से जब किसान कर्ज नहीं चुका पाते, तो बैंक वसूली की कठोर कार्रवाई कर उनकी परेशानियां बढ़ा देते हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बड़े कॉरपोरेट ऋणों के निपटारे में जनता के पैसों की कितनी सुरक्षा की गई है.

कॉरपोरेट लोन वेवर पर 'श्वेतपत्र' जारी करे केंद्र सरकार

डॉ प्रसाद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बड़े कॉरपोरेट ऋणों के समाधान और बैंकों द्वारा दी गई छूट पर एक विस्तृत 'श्वेतपत्र' (White Paper) जारी किया जाए. इसमें कुल ऋण राशि, वसूल की गई रकम और दी गई छूट का पारदर्शी ब्योरा देश के सामने रखा जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को आर्थिक असमानता की ओर धकेलने के बजाय सरकार को पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और मध्यम वर्ग, किसान व युवाओं को राहत देने की नीति पर काम करना चाहिए.

ये भी पढ़ें: रांची में चुनाव आयोग का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2-3 सितंबर को, मतदाता पंजीकरण पर जुटेंगे देश-विदेश के दिग्गज विशेषज्ञ



प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Vivek chandra

झारखंड में पिछले दो दशक से अधिक समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं. पत्रकारिता का ककहरा प्रसिद्ध पत्रकार और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश से सीखा है. सम सामयिक विषयों पर कई रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रही हैं.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >