हाईकोर्ट ने आदेश के अनुपालन में अवमानना याचिका पर की सुनवाई, पलामू के उपायुक्त को हाजिर होने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक शिक्षक नंदू राम के सेवा लाभ मामले में राज्य सरकार के जवाब पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए पलामू के उपायुक्त को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है. अदालत ने आदेशों के अनुपालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया है.


Jharlhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू के सहायक शिक्षक नंदू राम की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के जवाब पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने सवाल किया कि जब एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दायर राज्य सरकार की अपील भी खारिज हो चुकी है, तब भी आदेश का पूर्ण अनुपालन अब तक क्यों नहीं किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पलामू के उपायुक्त (डीसी) को अगली सुनवाई पर 2 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया.

जिला शिक्षा अधीक्षक हुए कोर्ट में उपस्थित

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए और अपना जवाब दाखिल किया. हालांकि, अदालत ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना और इस पर असंतोष व्यक्त किया. कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही निभानी होगी.

प्रार्थी ने सभी सेवा लाभ देने की उठाई मांग

मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि नंदू राम को पुनर्बहाल तो कर दिया गया है, लेकिन पुनर्बहाली से पहले की अवधि का वेतन और अन्य सेवा लाभ अब तक नहीं दिए गए हैं. उन्होंने कोर्ट को बताया कि पूर्व में एकल पीठ ने स्पष्ट आदेश दिया था कि प्रार्थी को पुनर्बहाल करने के साथ-साथ पुनर्बहाली से पहले के सभी वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ भी दिए जाएं. इसके बावजूद आदेश का पूर्ण पालन नहीं किया गया, जिसके कारण अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी.

पहले भी दे चुका है कोर्ट स्पष्ट निर्देश

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि एकल पीठ के आदेश का पूरी तरह अनुपालन सुनिश्चित करते हुए नंदू राम को पुनर्बहाली से पूर्व के सभी वेतन और सेवा लाभ उपलब्ध कराए जाएं. इसके बावजूद आदेश का पूर्ण पालन नहीं होने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और अब पलामू के उपायुक्त को स्वयं अदालत में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है.

1999 में हुई थी नियुक्ति, बीमारी के बाद हुआ विवाद

मामले के अनुसार, नंदू राम की नियुक्ति 31 दिसंबर 1999 को पलामू जिले में सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी. उनकी पदस्थापना सरकारी मध्य विद्यालय, विश्रामपुर में की गई थी. करीब पांच वर्ष तक सेवा देने के बाद वे गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित हो गए. स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें लंबी अवधि तक चिकित्सकीय अवकाश पर रहना पड़ा. वर्ष 2004 से वे लगातार इलाजरत रहे.

स्वस्थ होने के बाद भी नहीं मिला योगदान का अवसर

लंबे उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें काम करने के लिए फिट घोषित कर दिया. इसके बाद नंदू राम 19 जनवरी 2012 को विद्यालय में योगदान देने पहुंचे, लेकिन उन्हें कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं दी गई. बाद में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. इस कार्रवाई को उन्होंने अदालत में चुनौती दी. एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए पुनर्बहाली और सभी सेवा लाभ देने का आदेश दिया था. राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन वह भी खारिज हो गई.

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दो सितंबर को होगी अगली सुनवाई

अब अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी. उस दिन पलामू के उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि एकल पीठ के आदेश का अब तक पूर्ण अनुपालन क्यों नहीं किया गया. इस मामले पर अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां न्यायालय आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकता है.

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लेखक के बारे में

By राणा प्रताप सिंह

राणा प्रताप सिंह पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता जगत से जुड़े हैं. प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल में भी दस वर्ष का अनुभव है. जन सरोकार से जुड़ी खबरों में विशेष रूचि है.

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