रांची यूनिवर्सिटी के अस्थायी टीचरों को हाईकोर्ट से मिली संजीवनी, अंतिम फैसला आने तक नहीं जाएगी नौकरी

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय के अस्थायी व्याख्याताओं को बड़ी राहत दी है. अदालत ने अंतिम निर्णय आने तक उनकी सेवा को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. इससे शिक्षकों में खुशी की लहर है.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court, रांची : झारखंड हाईकोर्ट से रांची विश्वविद्यालय (Ranchi University) में अस्थायी रूप से कार्यरत व्याख्याताओं (Lecturers) के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने इन व्याख्याताओं की सेवा नियमितीकरण (Regularization) को लेकर दायर मुख्य याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रार्थियों को अंतरिम राहत दी है. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रार्थियों की ओर से दायर इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन (IA - अंतरिम आवेदन) को स्वीकार कर लिया है और विश्वविद्यालय प्रबंधन को यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया है.

मुख्य याचिका के अंतिम निर्णय तक नौकरी पर आंच नहीं

अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक इस मुख्य याचिका पर कोई अंतिम कानूनी निर्णय नहीं आ जाता, तब तक प्रार्थियों को उनकी सेवा से अलग नहीं किया जाए. हाईकोर्ट ने इस पूरी अवधि के दौरान उन्हें नौकरी से हटाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है. इस फैसले के बाद अब अस्थायी व्याख्याताओं की सेवा फिलहाल सुरक्षित हो गई है और विश्वविद्यालय प्रशासन उनके खिलाफ कोई दंडात्मक या सेवामुक्ति की कार्रवाई नहीं कर सकेगा. अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अगस्त माह की तारीख तय की है.

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प्रार्थी त्रिभुवन कुमार साही व अन्य ने लगाई थी अदालत से गुहार

उल्लेखनीय है कि यह याचिका प्रार्थी त्रिभुवन कुमार साही और अन्य अस्थायी व्याख्याताओं की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई है, जिसमें उन्होंने सालों से अपनी दी जा रही सेवाओं को देखते हुए नियमितीकरण (पक्का करने) की मांग की है. मुख्य रिट याचिका के कोर्ट में लंबित रहने के कारण व्याख्याताओं को सेवा से हटाए जाने का डर सता रहा था. इसी आशंका को देखते हुए प्रार्थियों ने एक आईए (IA) याचिका दाखिल कर अदालत से गुहार लगाई थी कि जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक उन्हें पद से न हटाया जाए. इस दरख्वास्त अदालत ने पूरी तरह न्याय संगत माना.

वरिष्ठ अधिवक्ता श्रेष्ठ गौतम ने मजबूती से रखा पक्ष

सुनवाई के दौरान अदालत में प्रार्थियों की ओर से जाने-माने अधिवक्ता श्रेष्ठ गौतम ने पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि ये व्याख्याता लंबे समय से विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जब तक उनकी नियमितीकरण की मुख्य मांग पर अदालत विचार कर रही है, तब तक उनकी आजीविका को सुरक्षित रखा जाना बेहद जरूरी है. अदालत ने इन तर्कों से सहमत होते हुए व्याख्याताओं के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी कर दिया.

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Published by: Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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