Jharkhand High Court, रांची (राणा प्रताप): झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का रिस्पांस की नहीं देने और आयोग द्वारा पुनर्परीक्षा आयोजित करने के निर्णय के खिलाफ दायर रिट याचिका पर सुनवाई की. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने मामले में प्रार्थियों और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) का पक्ष सुनने के बाद फिलहाल अभ्यर्थियों को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. अदालत ने आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब परीक्षा में गड़बड़ी की बात सामने आई थी, तो अब तक इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं कराई गई. मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है.
अभ्यर्थियों की दलील: ‘बिना दोषी चिह्नित किए पुनर्परीक्षा मनमाना कदम’
प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि जेएसएससी का निर्णय पूरी तरह से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है. उन्होंने तर्क दिया कि बिना परीक्षा केंद्र के अधिकृत दोषियों और अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान किए बिना, 2819 अभ्यर्थियों को एक साथ पुनर्परीक्षा के लिए बाध्य करना गलत है. अधिवक्ता ने कहा कि प्रार्थी किसी भी गलत गतिविधि में शामिल नहीं थे, फिर भी उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है. आयोग को पहले दोषियों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि निर्दोष अभ्यर्थियों को परेशान करना चाहिए.
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जेएसएससी का पक्ष: ‘संदेहास्पद गतिविधि के कारण लिया गया निर्णय’
वहीं, जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों के कंप्यूटरों में बाहर से संदेहास्पद गतिविधि का पता चला था. अभ्यर्थियों के करियर को ध्यान में रखते हुए आयोग ने केवल 2819 अभ्यर्थियों के पेपर-दो की पुनर्परीक्षा लेने का निर्णय लिया है. यह परीक्षा रांची के विभिन्न केंद्रों पर 8 मई को आयोजित की जानी है. आयोग का मानना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था.
23 अप्रैल के नोटिस को दी गई है चुनौती
बता दें कि प्रार्थी अर्चना कुमारी एवं अन्य ने याचिका दायर कर जेएसएससी द्वारा 23 अप्रैल को जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें 8 मई को पेपर-दो की पुनर्परीक्षा में शामिल होने का निर्देश दिया गया है. फिलहाल, 27 अप्रैल की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट के फैसले से ही तय होगा कि 8 मई को परीक्षा होगी या नहीं.
