रांची, (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS) की बदहाली और वहां संसाधनों के घोर अभाव पर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने संस्थान में फैकल्टी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को आगामी 8 जून तक सभी कमियों को दूर करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार सुनिश्चित कर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश की जाए.
BCI की रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल
अदालत के पिछले आदेश के आलोक में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की टीम ने 5 मई को संस्थान का व्यापक निरीक्षण किया था. सुनवाई के दौरान जब बीसीआई की निरीक्षण रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई, तो उसमें संस्थान की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. रिपोर्ट में बताया गया कि संस्थान के वर्तमान निदेशक विधि (Law) पृष्ठभूमि से नहीं हैं, जो एक कानूनी शिक्षण संस्थान के लिए अनिवार्य है. संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं की गई है और शिक्षकों (फैकल्टी) की संख्या भी न्यूनतम आवश्यकता से काफी कम है. साथ ही कार्यरत शिक्षकों को यूजीसी (UGC) के निर्धारित मानक के अनुरूप वेतनमान नहीं दिया जा रहा है. छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए मूट कोर्ट की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है और लाइब्रेरी में आवश्यक कानूनी पुस्तकों का भी भारी अभाव पाया गया है.
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छात्रों के भविष्य से जुड़ा है मामला
उल्लेखनीय है कि यह याचिका विद्यार्थी अंबेश चौबे एवं अन्य की ओर से दायर की गई थी. छात्रों ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं और योग्य शिक्षकों के अभाव में उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटका हुआ है. इससे पूर्व 10 अप्रैल को हुई सुनवाई में कोर्ट ने बीसीआई को इस संस्थान का निष्पक्ष निरीक्षण करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद अब विश्वविद्यालय की लापरवाही खुलकर सामने आ गई है.
अगली सुनवाई 9 जून को
हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अगली सुनवाई के लिए 9 जून 2026 की तिथि निर्धारित की है. अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कोर्ट द्वारा दी गई संक्षिप्त मोहलत के भीतर इन गंभीर कमियों को कैसे दूर करता है. यदि समय पर सुधार नहीं किए गए, तो विश्वविद्यालय को अदालत की अवमानना और सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
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