Jharkhand High Court, रांची (सतीश सिंह की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रोन्नति (Promotion) से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने प्रार्थी किशोर पटेल और मोहम्मद महफूज की याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि उन्हें उनके जूनियर के समान ही 30 दिसंबर 2023 की तिथि से असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर प्रोन्नति का लाभ दिया जाए. अदालत ने राज्य सरकार को इस आदेश का अनुपालन करने और चार सप्ताह के भीतर कोर्ट को सूचित करने का समय दिया है.
जूनियर को मिला लाभ, सीनियर दो साल पीछे रहे
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विभाग ने उनके जूनियर सत्यदेव प्रसाद को तो 30 दिसंबर 2023 को ही असिस्टेंट इंजीनियर बना दिया था, लेकिन किशोर पटेल और मोहम्मद महफूज को सीनियर होने के बावजूद दो साल तक इंतजार कराया गया. विभाग ने आखिरकार उन्हें 26 सितंबर 2025 को प्रोन्नति दी. प्रार्थियों ने दलील दी कि जब जूनियर को लाभ मिल चुका है, तो वे भी उसी तिथि से लाभ पाने के वैधानिक हकदार हैं, क्योंकि वे वरिष्ठता सूची में ऊपर थे.
ACR उपलब्ध न होना कोई बहाना नहीं: हाईकोर्ट
विभाग की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि संबंधित कर्मचारियों का वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) समय पर उपलब्ध नहीं था, जिसके कारण उनकी प्रोन्नति में देरी हुई. इस तर्क पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस दीपक रोशन ने स्पष्ट किया कि एसीआर का कस्टोडियन (रक्षक) सरकार होती है, न कि कर्मचारी. अदालत ने कहा कि विभाग द्वारा अपनी फाइलों को न संभाल पाना और उसका आधार बनाकर किसी योग्य कर्मचारी को समय पर पदोन्नति से वंचित करना पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है.
अदालत का कड़ा संदेश
अदालत ने माना कि चूंकि जूनियर अधिकारी को पहले ही प्रमोशन का लाभ दिया जा चुका है, इसलिए कानूनन सीनियर को उसी तिथि से काल्पनिक (Notional) या वास्तविक लाभ देने से नहीं रोका जा सकता. इस फैसले से राज्य के अन्य विभागों में भी उन कर्मचारियों को बल मिलेगा जिनके प्रमोशन की फाइलें ‘एसीआर’ या अन्य प्रशासनिक कमियों के नाम पर दफ्तरों में धूल फांक रही हैं. अदालत ने साफ कर दिया कि प्रशासनिक खामियों का दंड कर्मचारियों के करियर को नहीं दिया जा सकता.
