Hemant Soren, रांची (सुनील चौधरी की रिपोर्ट): झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारे में मंगलवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बिना किसी पारंपरिक काफिले और सुरक्षा प्रोटोकॉल के सीधे प्रोजेक्ट भवन (मंत्रालय) पहुंच गए. आमतौर पर दर्जनों वाहनों और कमांडो के घेरे में रहने वाले मुख्यमंत्री का यह ‘सिंगल कार’ अवतार देखकर मंत्रालय के कर्मचारी और मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी भी हक्के-बक्के रह गए.
ट्रैफिक और जमीनी हकीकत का लिया जायजा
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री का यह कदम पूर्व नियोजित नहीं था. उन्होंने शहर की वास्तविक ट्रैफिक स्थिति और आम जनता को होने वाली परेशानियों को करीब से महसूस करने के लिए बिना काफिले के निकलने का फैसला किया. प्रोजेक्ट भवन पहुंचने के दौरान उन्होंने खुद स्थिति का आकलन किया, ताकि व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें.
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हैरान रह गए मंत्रालय के कर्मचारी
जब मुख्यमंत्री की गाड़ी अकेले मंत्रालय के परिसर में दाखिल हुई, तो कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया. बिना पूर्व सूचना और बिना सुरक्षा दल के मुख्यमंत्री के आगमन ने अधिकारियों को भी अलर्ट मोड पर ला दिया. प्रशासन में चर्चा है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने और जमीनी हालात का प्रत्यक्ष आकलन करने के उद्देश्य से किया गया था.
सादगी की हो रही है तारीफ
मुख्यमंत्री के इस कदम को सोशल मीडिया और आम लोगों के बीच काफी सराहा जा रहा है. लोगों का कहना है कि वीआईपी कल्चर को छोड़कर इस तरह जमीन पर उतरना एक मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता को दर्शाता है. राजनीतिक गलियारों में भी इस औचक दौरे के कई मायने निकाले जा रहे हैं.
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