झारखंड हाइकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा, मृत ट्रेलर चालक के परिजनों को मिलेंगे 28.17 लाख रुपये

झारखंड हाइकोर्ट ने एक बड़े फैसले में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले ट्रेलर चालक के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 28.17 लाख रुपये कर दिया है. अदालत ने बीमा कंपनी की दलीलें खारिज कर दीं.

Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत ट्रेलर चालक के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाकर 28.17 लाख रुपये कर दिया है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने बीमा कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें मृतक की कथित बिना लाइसेंस ड्राइविंग और हादसे में उसकी भी गलती होने का दावा किया गया था. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आमने-सामने की टक्कर होने से मृतक को हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. कहा कि केवल हेड-ऑन टक्कर होना अपने आप में किसी चालक की लापरवाही साबित नहीं करता. रिकॉर्ड में एफआइआर और आरोप पत्र दूसरे ट्रेलर के चालक की तेज और लापरवाही से ड्राइविंग की ओर इशारा करते हैं. 

बीमा कंपनी की दलील खारिज, मुआवजे पर ब्याज का आदेश बरकरार 

बीमा कंपनी मृतक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र सबूत भी पेश नहीं कर सकी. अदालत ने मुआवजे पर 30 सितंबर 2022 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश बरकरार रखा है. बीमा कंपनी को पहले से जमा राशि को समायोजित करते हुए बढ़ी हुई राशि ट्रिब्यूनल में आठ सप्ताह के भीतर जमा करनी होगी. नाबालिग बच्चों के हिस्से व राशि के बंटवारे से संबंधित ट्रिब्यूनल के पुराने निर्देश भी लागू रहेंगे. वहीं बीमा कंपनी ने अदालत में कहा कि मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, इसलिए बीमा कंपनी को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना चाहिए. बीमा कंपनी ने यह भी कहा कि हादसा आमने-सामने की टक्कर से हुआ, इसलिए मृतक की भी कुछ लापरवाही रही होगी. अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के सामने अपनी लिखित दलील में यह बात उठायी ही नहीं थी. इसके अलावा इस मुद्दे पर ट्रिब्यूनल ने कोई अलग मुद्दा भी तय नहीं किया था. मृतक का ड्राइविंग लाइसेंस रिकॉर्ड में पेश किया गया था.

11,997 की जगह 16 हजार रुपये मासिक आय मानी

मुआवजे की गणना में भी अदालत ने बदलाव किया. ट्रिब्यूनल ने मृतक की मासिक आय 11,997 रुपये तय की थी, जो कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के आधार पर थी. परिजनों ने 45 हजार रुपये मासिक आय का दावा किया था, लेकिन इसके समर्थन में वे वेतन रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज पेश नहीं कर सके. अदालत ने 45 हजार रुपये की आय को स्वीकार नहीं किया, लेकिन यह भी कहा कि केवल दस्तावेज नहीं होने के कारण आय को न्यूनतम मजदूरी तक सीमित करना उचित नहीं है. कोर्ट ने मृतक के चालक होने और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए उसकी मासिक आय 16 हजार रुपये तय की. कुल मुआवजा 28.17 लाख रुपये तय किया.

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यह था मामला

यह मामला 31 मई 2022 को छोटूरमा हट्टाला के पास हुए हादसे से जुड़ा है. मृतक मुकेश कुमार चौधरी ट्रेलर चला रहे थे. उनके ट्रेलर की टक्कर एक दूसरे ट्रेलर से हो गयी थी. हादसे के बाद उन्हें बांसगढ़ अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. मामले में बालरमपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई और दूसरे ट्रेलर के चालक रोहित कुमार के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था. ट्रिब्यूनल ने मृतक की मासिक आय 11,997 रुपये तय की थी, जो कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के आधार पर थी. इस आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी ने अपील दायर की थी.

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By Rana pratap

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