पलामू सड़क हादसे में मुआवजा दोगुना, झारखंड हाईकोर्ट ने राशि बढ़ाकर 18.80 लाख रुपये किया

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पलामू सड़क हादसे के पीड़ित परिवार को मिलने वाले मुआवजे की राशि को लगभग दोगुना कर दिया है। बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए अदालत ने 9.38 लाख रुपये से बढ़ाकर 18.80 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।


Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू के एक सड़क हादसे से जुड़े मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतक के परिजनों को मिलने वाली क्षतिपूर्ति लगभग दोगुनी कर दी है. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अदालत ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए मुआवजा 9.38 लाख रुपये से बढ़ाकर 18.80 लाख रुपये करने का आदेश दिया. अदालत ने मृतक की मां किरण कपूर की क्रॉस ऑब्जेक्शन याचिका स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को आठ सप्ताह के भीतर बढ़ी हुई राशि जमा करने का निर्देश दिया.

2010 में पुणे में हुआ था हादसा

मामला 26 जून 2010 का है. महाराष्ट्र के पुणे जिले के मुलशी स्थित नॉर्थ प्वाइंट चेक पोस्ट के पास एक पानी का टैंकर ढलान पर खड़ा था. आरोप था कि टैंकर लापरवाही से पार्क किया गया था, जिसके बाद वह लुढ़ककर शिव शंकर कपूर पर चढ़ गया. गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई थी. इसके बाद पलामू के डालटनगंज स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में मुआवजे का दावा दायर किया गया था.

अंतिम रिपोर्ट से नहीं खत्म होती जिम्मेदारी

बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि आपराधिक मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल होने के कारण चालक की लापरवाही सिद्ध नहीं होती, इसलिए कंपनी पर दायित्व नहीं डाला जा सकता. अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि मोटर दुर्घटना दावा मामलों में न्यायाधिकरण को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से यह तय करना होता है कि दुर्घटना किसकी लापरवाही से हुई. केवल पुलिस की अंतिम रिपोर्ट किसी पक्ष को स्वतः दोषमुक्त नहीं कर सकती.

प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही पर भरोसा

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाणपत्र और मोटर वाहन निरीक्षक की रिपोर्ट एक-दूसरे की पुष्टि करती हैं. इन साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि टैंकर चालक की लापरवाही के कारण ही दुर्घटना हुई थी. इसलिए दावा अधिकरण का यह निष्कर्ष सही माना गया कि चालक की लापरवाही साबित होती है.

इसे भी पढ़ें: JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को नहीं मिली राहत, CID की विशेष अदालत ने खारिज की जमानत याचिका

आय और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ा

हाईकोर्ट ने मुआवजे की गणना करते हुए मृतक की वार्षिक आय 1.52 लाख रुपये बरकरार रखी. अदालत ने कहा कि आयकर रिटर्न मृत्यु के बाद दाखिल होने के बावजूद उसे टीडीएस प्रमाणपत्र और अन्य साक्ष्यों का समर्थन प्राप्त था. मृतक 28 वर्ष का स्व-रोजगार करने वाला ठेकेदार था, इसलिए उसकी आय में 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं जोड़ी गईं. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के तय मानकों के अनुसार 17 का गुणक लागू किया गया. साथ ही अंतिम संस्कार, संपत्ति की हानि और फिलियल कंसोर्टियम मद में भी अलग से राशि जोड़ी गई. इसके आधार पर कुल मुआवजा 18.80 लाख रुपये तय किया गया.

इसे भी पढ़ें: पलामू में हादसा: चैनपुर में तालाब में डूबने से मां और दो वर्षीय बेटे की मौत

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rana pratap

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >