रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची जिले के सिकिदिरी थाना क्षेत्र स्थित दात्मा गांव की जमीन विवाद से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दूसरी अपील संख्या 136/2026 को खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि निचली अदालत और प्रथम अपीलीय अदालत के फैसलों में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है और इस मामले में कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं बनता है.
एकतरफा डिक्री के खिलाफ दायर की गई थी अपील
मामला दात्मा गांव निवासी राम किशन महतो और उनकी पत्नी पंचमी देवी से जुड़ा है. उन्होंने रांची के एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर-XVII द्वारा सिविल अपील संख्या 70/2024 में पारित आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में दूसरी अपील दायर की थी. इससे पहले मूल वाद संख्या 576/2023 में मो. सलीम खान ने 14 नवंबर 1945 के बिक्री विलेख के आधार पर अपने स्वामित्व की घोषणा और कब्जा दिलाने की मांग को लेकर मुकदमा दायर किया था. ट्रायल कोर्ट ने 24 जुलाई 2023 को वादी के पक्ष में एकतरफा डिक्री पारित कर दी थी, जिसे बाद में प्रथम अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा.
एकतरफा कार्रवाई को बताया था गलत
अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आयुष आदित्य ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की, जिसे प्रथम अपीलीय अदालत ने भी सही ठहराया. उन्होंने यह भी कहा कि खाता संख्या 56 के प्लॉट संख्या 64 की 10 डेसिमल जमीन के संबंध में दोनों अदालतों ने गलत निष्कर्ष निकाले हैं. इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न निर्धारित कर दूसरी अपील स्वीकार करने का आग्रह किया.
1945 की बिक्री विलेख और खतियान महत्वपूर्ण साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि 14 नवंबर 1945 के बिक्री विलेख के माध्यम से शेख रमजान और अन्य लोगों ने बहोरां महतो से 15.60 एकड़ जमीन खरीदी थी. बाद में पारिवारिक बंटवारे में शेख रमजान के हिस्से में 5.20 एकड़ जमीन आई थी. वादी मो. सलीम खान का दावा था कि उनके दादा और बाद में उनके पिता तथा परिवार के अन्य सदस्यों का उक्त जमीन पर कब्जा रहा और विवादित 10 डेसिमल जमीन भी उसी का हिस्सा है. अदालत ने पाया कि इस संबंध में पेश किए गए दस्तावेज और गवाह वादी के पक्ष का समर्थन करते हैं.
अलग-अलग प्लॉट होने के कारण नहीं माना गया दावा
हाईकोर्ट ने प्रथम अपीलीय अदालत के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि वादी का दावा खाता संख्या 56 के प्लॉट संख्या 64 की 10 डेसिमल जमीन से संबंधित है, जबकि अपीलकर्ताओं का दावा प्लॉट संख्या 94 की 20 डेसिमल जमीन पर आधारित था. अदालत ने पाया कि अपीलकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत 1971 के बिक्री विलेख में भी प्लॉट संख्या 94 का ही उल्लेख है, न कि प्लॉट संख्या 64 का. इसके बावजूद प्लॉट संख्या में सुधार के लिए कभी कोई कानूनी कदम नहीं उठाया गया.
अतिरिक्त साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं कर सके अपीलकर्ता
अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम अपीलीय अदालत के समक्ष अपीलकर्ताओं के पास अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर था, लेकिन उन्होंने अपने दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज या अतिरिक्त साक्ष्य पेश नहीं किया. इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि दोनों निचली अदालतों के निष्कर्ष तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित हैं.
इसे भी पढ़ें: दो साल से फरार था नाबालिग से दुष्कर्म का आरोपी, इंस्टाग्राम ने कर दी चुगली तो हुआ गिरफ्तार
दूसरी अपील क्यों हुई खारिज?
न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी ने कहा कि मामले में ऐसा कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं है, जिस पर दूसरी अपील में विचार किया जाए. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राम किशन महतो और पंचमी देवी द्वारा दायर दूसरी अपील संख्या 136/2026 को खारिज कर दिया. इस फैसले के साथ दात्मा गांव की जमीन से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में मो. सलीम खान के पक्ष में निचली अदालतों द्वारा दिए गए आदेश को अंतिम रूप से बरकरार रखा गया.
इसे भी पढ़ें: मॉनसूनी बूंद टपकने से पहले निर्झर-निर्मल हो जाएगी ‘आपन सरस्वतिया’, गढ़वा में 21वें दिन चलीं 12 मशीनें
