रांची. प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से राज्य की पारिस्थितिकी, जैव विविधता और वन संरक्षण पर केंद्रित शोध रिपोर्ट एवं न्यूजलेटर का विमोचन किया. प्रकाशनों में वैज्ञानिक शोध, फील्ड स्तर के वन प्रबंधन और मिशन लाइफ के तहत जन-जागरूकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है.
आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण और वृक्ष सुधार पर जोर
रिपोर्ट में राज्य के जंगलों में तेजी से फैल रही हानिकारक खरपतवार के उन्मूलन और आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है. साथ ही बेहतर गुणवत्ता वाले बीज और पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए झारखंड के चुनिंदा कैंडिडेट प्लस ट्री की पहचान एवं वर्गीकरण किया गया है.
फोरेंसिक बॉटनी से वन अपराध की वैज्ञानिक जांच
प्रकाशन में पर्यावरणीय अपराधों की जांच में फोरेंसिक बॉटनी के इस्तेमाल की जानकारी दी गयी है. झारखंड में पहली बार परागकण और वनस्पति साक्ष्यों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव अपराधों की वैज्ञानिक जांच की तकनीकों को रेखांकित किया गया है. तितलियों की विविधता और परागण पारिस्थितिकी पर किये गये शोध को भी इसमें शामिल किया गया है.
वनाग्नि के प्रभाव और दुर्लभ वनस्पतियों का दस्तावेजीकरण
रिपोर्ट में वनाग्नि के प्रभाव और दुर्लभ वनस्पतियों की खोज से जुड़े शोध के माध्यम से जंगलों में लगने वाली आग के पारिस्थितिकीय दुष्प्रभावों का विश्लेषण किया गया है. राज्य के वनों में पहली बार दर्ज की गयी दुर्लभ वनस्पति प्रजाति का दस्तावेजीकरण भी किया गया है. इसके अलावा "गंगा डॉल्फिन व राजमहल की कहानी" पर विशेष आलेख शामिल है.
हजारीबाग स्थित ऐतिहासिक कनहरी हिल के पारिस्थितिकीय महत्व को भी रेखांकित किया गया है. इसे बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट घोषित करने के मानकों का विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट में प्रस्तुत किया गया है.
मौके पर जैव विविधता पर्षद के प्रबंध निदेशक विश्वनाथ शाह, वन संरक्षक प्रशासन पीआर नायडू और उप वन संरक्षक विजय शंकर दुबे मौजूद थे.
