रांची. झारखंड में भूमि सर्वे की अद्यतन रिपोर्ट नहीं होने के कारण किसानों को पहचान पत्र देने का काम अटक गया है. झारखंड में भी दो जिलों से इसे पायलट के तौर पर शुरू करने की योजना थी. चूंकि राज्य में 1932 के बाद सभी जिलों का सर्वे नहीं हुआ है. इस कारण वर्तमान किसान का नाम रजिस्टर टू में नहीं है. भारत सरकार वंशावली के आधार पर किसान का डिटेल नहीं मान रही है. इस कारण कृषि विभाग उत्तराधिकारी म्यूटेशन को इसमें जोड़ने का आग्रह किया है. यह मामला अभी राज्य सरकार के कैबिनेट के अनुमोदन के लिए भेजा गया है. कैबिनेट के अनुमोदन के बाद ही यह राज्य में शुरू हो पायेगा.
क्या होगा फायदा
किसान आइडी बनाने से एक स्थान पर पूरी जानकारी मिलेगी. किसान को हर बार स्कीम का लाभ लेने के लिए कागजात जमा करने की जरूरत नहीं होगी. किसान को आइडी इंट्री करने से ही पूरी जानकारी मिल जायेगी. अभी केसीसी लोन लेते समय हर वर्ष किसानों को अपनी जमीन का अद्यतन रिपोर्ट जमा करना पड़ता है. केंद्र की एग्रीस्टैक व्यवस्था के तहत किसानों की डिजिटल पहचान तैयार की जा रही है. इसके लिए फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक किसान को यूनिक किसान आइडी देने की व्यवस्था है. किसान की जमीन, फसल और अन्य कृषि संबंधी जानकारी को इस डिजिटल पहचान से जोड़ा जा सकेगा. इससे सरकारी योजनाओं में पात्र किसानों की पहचान और लाभ के सीधे हस्तांतरण की प्रक्रिया आसान होगी.
देश में 10 करोड़ किसानों का बन चुका है आइडी
केंद्र सरकार ने 2026-27 तक 11 करोड़ किसानों की डिजिटल पहचान बनाने का लक्ष्य रखा है. जुलाई 2026 तक देश में 10.18 करोड़ से अधिक किसान आइडी बन चुकी थीं. झारखंड में पहले से ही किसानों के लिए अलग-अलग डिजिटल रजिस्ट्रेशन व्यवस्थाएं चल रही हैं. राज्य के फसल राहत योजना पोर्टल पर किसान का आधार, मोबाइल, जिला, प्रखंड, पंचायत, गांव, बैंक खाता और किसान का प्रकार जैसी जानकारी दर्ज की जाती है. वहीं धान अधिप्राप्ति के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है.
