रांची. नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन “विकसित भारत की यात्रा के वित्तपोषण” में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दे उठाये. वित्त मंत्री किशोर ने केंद्र सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं. उन्होंने कहा कि खनन पर सेस लगाने का अधिकार राज्यों को फिर मिले, जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई की जाये और जी-राम-जी योजना में केंद्र-राज्य हिस्सेदारी का 90:10 का अनुपात बहाल किया जाये.
केंद्र की नीतियों से 20,000 से 22,000 करोड़ की संभावित क्षति
राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण झारखंड को 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने खनिज क्षेत्र में हुए संशोधनों और कर नीतियों को राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया.
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य का राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रित है और पूंजीगत व्यय भी उच्च स्तर पर बना हुआ है.
विकसित भारत के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को मिले विशेष सहयोग
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग और प्राथमिकता देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल मजबूत GDP, प्रति व्यक्ति आय और विनिर्माण उत्पादन नहीं होना चाहिए. इसके साथ समतामूलक और सशक्त समाज का निर्माण भी जरूरी है.
उन्होंने आय वितरण में असमानता, गरीबी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत बतायी.
झारखंड के वित्त मंत्री ने ये बिंदु उठाये
- जीएसटी से हुई क्षति की भरपाई करने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष रखी.
- जी-राम-जी योजना, जो कि एक सरकारी योजना है जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर किसी विशेष उद्देश्य के लिए काम करते हैं, में केंद्र-राज्य हिस्सेदारी का 90:10 अनुपात बहाल करने की मांग.
- केंद्र सरकार की नीतियों से झारखंड को 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की क्षति.
- खनिज क्षेत्र में हुए संशोधनों और कर नीतियां राज्य के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं.
कृषि, सिंचाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ाने का सुझाव
वित्त मंत्री ने कहा कि देश की बड़ी आबादी गांवों में रहती है और कृषि का बड़ा हिस्सा वर्षा पर निर्भर है. ऐसे में सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में वित्तपोषण बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश को भी प्राथमिकता देने की बात कही.
18 और 19 सितंबर को हुआ सम्मेलन
उल्लेखनीय है कि सम्मेलन का आयोजन 18 और 19 सितंबर को किया गया. इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ ही राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री मौजूद रहे. झारखंड की ओर से वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी, संयुक्त सचिव चंद्रभूषण प्रसाद, मंत्री के आप्त सचिव अनिरवान आईच, नरेंद्र कुमार आदि अधिकारी शामिल हुए.
