अब महाधिवक्ता कार्यालय में 29 की जगह होंगे 63 वकील, जूनियर लॉ एसोसिएट के पद हुए समाप्त

झारखंड सरकार ने लॉ अफसरों की नियुक्ति और भुगतान की पूरी व्यवस्था बदल दी है. महाधिवक्ता की मासिक फीस 2.75 लाख रुपये तय की गई है और पदों की संख्या 29 से बढ़ाकर 63 कर दी गई है. जूनियर लॉ एसोसिएट की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है.

पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट 

झारखंड सरकार ने लॉ अफसरों की नियुक्ति और भुगतान की पूरी व्यवस्था बदल दी है. नयी नियमावली और फीस का ढांचा लागू कर दिया गया है. महाधिवक्ता को अधिकतम 2.75 लाख रुपये ही मासिक भुगतान का लिमिट तय किया गया है, वहीं नियुक्तियों के लिए नियम और अधिक पारदर्शी बनाये गये हैं. पहले महाधिवक्ता समेत 29 सरकारी वकील होते थे, जिनमें 11 सलाहकार शामिल थे. इनके पद समाप्त कर दिये गये हैं. पूर्व में महाधिवक्ता की अनुशंसा पर उनके कार्यालय में जूनियर लॉ एसोसिएट के तौर पर वकील रखे जाते थे. फिलहाल इनकी संख्या लगभग 150 है. नयी नियमावली में यह व्यवस्था खत्म कर दी गयी है. इससे जूनियर लॉ एसोसिएट के तौर पर काम कर रहे सभी अब बाहर हो जायेंगे. इसकी जगह अब महाधिवक्ता कार्यालय में अब कुल 63 पद नियुक्त होंगे. नयी नीति में एक वरीय अपर महाधिवक्ता बढ़ाये गये हैं. अब इनकी संख्या दो हो जायेगी. 

44 नियुक्तियों तक पुरानी व्यवस्था जारी

पहले सरकारी वकीलों की संख्या केवल छह रहती थी. अब नयी व्यवस्था में सरकारी वकीलों की संख्या बढ़ाकर 44 कर दी गयी है. जब तक 44 नये लॉ अफसर की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक पुरानी व्यवस्था चलती रहेगी. इधर सरकार ने कहा कि विधि पदाधिकारियों के साथ पूर्व सेनियुक्त एवं कार्यरत एसोसिएट काउंसिल की सेवा बरकरार रखना एक पूर्णत: तात्कालिक व्यवस्था के तहत होगी. लेकिन यह तभी तक रहेगी, जब तक कि द झारखंड लॉ अफसर इंगेजमेंट रूल्स 2026 के आलोक में सरकारी वकील नियुक्त नहीं हो जाते. इस संबंध में सरकार ने 24 जुलाई को आदेश जारी कर दिया है. 

पहले कितने पद थे अब कितने 

पदपूर्व से स्वीकृत पदप्रत्यर्पित पदनये सृजित पद
महाधिवक्ता100
वरीय अपर महाधिवक्ता102
अपर महाधिवक्ता301
वरीय स्थायी सलाहकार110
स्थायी सलाहकार640
स्थायी सलाहकार (माइंस)330
स्थायी सलाहकार (भू हदबंदी)330
राजकीय अधिवक्ता501
सरकारी वकील6044
लॉ रिसर्च ऑफिसर0015
कुल291163

एक तिहाई हो जायेगी स्ट्रेंथ, हो सकती है परेशानी

पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार कहते है कि नयी नीति चीजों को सुव्यवस्थित करने की बजाय और जटिल करेगी. इससे हाइकोर्ट को सही प्रकार से सहयोग नहीं मिलेगा और अधिवक्ताओं की संख्या कम होने से सरकारी मामलों की पेंडेंसी बढ़ेगी. सर्वाधिक मामले सरकार से ही जुड़े होते हैं, अब जब जूनियर ही नहीं होगा तो सीनियर वकील कितने कोर्ट में एक साथ दौड़ पायेंगे. इसके अलावा जेपीएससी, जेएसएससी जैसी संस्थाओं व अन्य में निजी अधिवक्ताओं को हायर करने का प्रचलन बढ़ेगा.

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लेखक के बारे में

By प्रिया गुप्ता

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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