पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट
झारखंड सरकार ने लॉ अफसरों की नियुक्ति और भुगतान की पूरी व्यवस्था बदल दी है. नयी नियमावली और फीस का ढांचा लागू कर दिया गया है. महाधिवक्ता को अधिकतम 2.75 लाख रुपये ही मासिक भुगतान का लिमिट तय किया गया है, वहीं नियुक्तियों के लिए नियम और अधिक पारदर्शी बनाये गये हैं. पहले महाधिवक्ता समेत 29 सरकारी वकील होते थे, जिनमें 11 सलाहकार शामिल थे. इनके पद समाप्त कर दिये गये हैं. पूर्व में महाधिवक्ता की अनुशंसा पर उनके कार्यालय में जूनियर लॉ एसोसिएट के तौर पर वकील रखे जाते थे. फिलहाल इनकी संख्या लगभग 150 है. नयी नियमावली में यह व्यवस्था खत्म कर दी गयी है. इससे जूनियर लॉ एसोसिएट के तौर पर काम कर रहे सभी अब बाहर हो जायेंगे. इसकी जगह अब महाधिवक्ता कार्यालय में अब कुल 63 पद नियुक्त होंगे. नयी नीति में एक वरीय अपर महाधिवक्ता बढ़ाये गये हैं. अब इनकी संख्या दो हो जायेगी.
44 नियुक्तियों तक पुरानी व्यवस्था जारी
पहले सरकारी वकीलों की संख्या केवल छह रहती थी. अब नयी व्यवस्था में सरकारी वकीलों की संख्या बढ़ाकर 44 कर दी गयी है. जब तक 44 नये लॉ अफसर की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक पुरानी व्यवस्था चलती रहेगी. इधर सरकार ने कहा कि विधि पदाधिकारियों के साथ पूर्व सेनियुक्त एवं कार्यरत एसोसिएट काउंसिल की सेवा बरकरार रखना एक पूर्णत: तात्कालिक व्यवस्था के तहत होगी. लेकिन यह तभी तक रहेगी, जब तक कि द झारखंड लॉ अफसर इंगेजमेंट रूल्स 2026 के आलोक में सरकारी वकील नियुक्त नहीं हो जाते. इस संबंध में सरकार ने 24 जुलाई को आदेश जारी कर दिया है.
पहले कितने पद थे अब कितने
| पद | पूर्व से स्वीकृत पद | प्रत्यर्पित पद | नये सृजित पद |
| महाधिवक्ता | 1 | 0 | 0 |
| वरीय अपर महाधिवक्ता | 1 | 0 | 2 |
| अपर महाधिवक्ता | 3 | 0 | 1 |
| वरीय स्थायी सलाहकार | 1 | 1 | 0 |
| स्थायी सलाहकार | 6 | 4 | 0 |
| स्थायी सलाहकार (माइंस) | 3 | 3 | 0 |
| स्थायी सलाहकार (भू हदबंदी) | 3 | 3 | 0 |
| राजकीय अधिवक्ता | 5 | 0 | 1 |
| सरकारी वकील | 6 | 0 | 44 |
| लॉ रिसर्च ऑफिसर | 0 | 0 | 15 |
| कुल | 29 | 11 | 63 |
एक तिहाई हो जायेगी स्ट्रेंथ, हो सकती है परेशानी
पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार कहते है कि नयी नीति चीजों को सुव्यवस्थित करने की बजाय और जटिल करेगी. इससे हाइकोर्ट को सही प्रकार से सहयोग नहीं मिलेगा और अधिवक्ताओं की संख्या कम होने से सरकारी मामलों की पेंडेंसी बढ़ेगी. सर्वाधिक मामले सरकार से ही जुड़े होते हैं, अब जब जूनियर ही नहीं होगा तो सीनियर वकील कितने कोर्ट में एक साथ दौड़ पायेंगे. इसके अलावा जेपीएससी, जेएसएससी जैसी संस्थाओं व अन्य में निजी अधिवक्ताओं को हायर करने का प्रचलन बढ़ेगा.
ये भी पढ़ें...
गर्भ में ही जेनेटिक बीमारियों की होगी पहचान, RIMS की बड़ी उपलब्धि, अगले एक साल तक जांच फ्री
धनबाद: असर्फी हॉस्पिटल पर निगम की बड़ी कार्रवाई, 3.27 करोड़ जुर्माना, अवैध निर्माण हटाने का आदेश
