Ranchi news : नगरपालिका क्षेत्र में आरओ वाटर प्लांट के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य

आरओ वाटर प्लांट पर लगी लगाम, संचालन के लिए नियमावली लागू की गयी. प्लांट की वजह से संबंधित क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर कम होता पाये जाने या आम लोगों को पानी की किल्लत होने पर उसे बंद कराया जायेगा.

रांची. राज्य में धड़ल्ले से चल व खुल रहे रिवर्स ऑसमोसिस (आरओ) वाटर प्लांट पर नियंत्रण के लिए सरकार ने नियमावली लागू कर दी है. नगर विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक आरओ वाटर प्लांट के संचालन से शहरी क्षेत्रों में भूगर्भ जल स्तर की लगातार कमी हो रही है. भूमिगत जल स्रोतों के अत्यधिक दोहन से गर्मी के मौसम में लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ता है. नगरपालिका क्षेत्र में नलकूप, कुआं, तालाब, डीप बोरिंग, चहबच्चा, कुंड या फुहारा खोलने या बनवाने की अनुमति या लाइसेंस नगरपालिका जारी करेगा. नगरपालिका क्षेत्र स्थित आरओ वाटर प्लांट के संचालन के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है. सभी आरओ प्लांट संचालकों को संबंधित नगरपालिका से तीन महीनों के अंदर लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है. उनको केंद्रीय भूगर्भ जल प्राधिकार द्वारा निर्गत अनापत्ति प्रमाण पत्र और वर्षा जल संचयन के विवरण के साथ लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा. शहरी क्षेत्रों में केंद्रीय भूगर्भ जल पर्षद के मापदंडों के मुताबिक भूगर्भ जल निकासी के लिए चार विभिन्न क्षेत्रों में लाइसेंस जारी किया जायेगा. सुरक्षित क्षेत्राें में लाइसेंस प्रदान किया जायेगा. अर्द्ध गंभीर क्षेत्र में 31 मार्च 2026 व गंभीर क्षेत्र में 31 मार्च 2025 तक के लिए लाइसेंस दिया जायेगा. वहीं, अत्यधिक दोहन क्षेत्र में आरओ वाटर प्लांट संचालन के लिए लाइसेंस नहीं दिया जायेगा. लाइसेंस को हर साल नवीकरण कराना अनिवार्य होगा. प्लांट संचालक को प्रत्येक तीन महीने पर राज्य प्रयोगशाला या अन्य सरकारी संस्था से लैब टेस्ट कराते हुए नगर पालिका को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना होगा. प्लांट के लिए केवल नगरपालिका की अनुमति लेकर की गयी बोरिंग या खोदे गये कुआं के पानी का इस्तेमाल किया जायेगा. प्लांट की वजह से संबंधित क्षेत्र में भूमिगत जलस्तर कम होता पाये जाने या आम लोगों को पानी की किल्लत होने पर उसे बंद कराया जायेगा. तय नियमों का उल्लंघन करने पर प्लांट को लाइसेंस अवधि शेष रहते हुए भी बंद कर दिया जायेगा.

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