रांची : इस्कॉन रांची द्वारा आयोजित पांच दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन पूरी तरह भक्ति, आध्यात्मिक आनंद और उल्लास से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. कार्यक्रम का शुभारंभ मधुर हरिनाम संकीर्तन से हुआ, जहां भक्तों ने 'हरे कृष्ण महामंत्र' का सामूहिक गान कर पूरे वातावरण को भक्ति में सराबोर कर दिया. मृदंग और करताल की थाप के बीच गूंजते मंत्रों से पूरा परिसर वैकुंठ जैसा प्रतीत हुआ.
श्रीकृष्ण की दामोदर लीला और प्रेम की शक्ति
संकीर्तन के बाद लीलापुरुषोत्तम दास ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध 'यशोदा-दामोदर उखल बंधन लीला' का अत्यंत रोचक और प्रेरणादायी प्रवचन प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि मनुष्य को अपने सभी कर्तव्य भगवान की प्रसन्नता के लिए करने चाहिए. उन्होंने यह भी साझा किया कि त्रेतायुग के जो वानर भगवान राम के साथ थे, वही श्रीकृष्ण लीला में उनके साथ मक्खन खाने वाले वानर बने. कथा का मुख्य संदेश यह रहा कि सर्वशक्तिमान भगवान को केवल निष्कपट प्रेम और भक्ति की रस्सी से ही बांधा जा सकता है.
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महाप्रसाद वितरण और जन्माष्टमी की तैयारी
प्रवचन के बाद फिर से उत्साहपूर्ण हरिनाम संकीर्तन, भव्य आरती और दीपों की जगमगाहट के बीच संध्या के कार्यक्रमों का समापन हुआ. अंत में सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का प्रेमपूर्वक वितरण किया गया. यह पांच दिवसीय आध्यात्मिक आयोजन ISKCON रांची द्वारा आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पूर्व आयोजित किया जा रहा है. संस्था ने सभी शहरवासियों से आगामी कार्यक्रमों में शामिल होकर भक्ति का लाभ उठाने की अपील की है.
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