रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट
80Th Independence Day: झारखंड में 80वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न इस बार एक खास उपलब्धि के बीच मनाया गया. राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच नक्सली प्रभाव से लगभग मुक्त झारखंड में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित हुआ. झारखंड पुलिस के आईजी अभियान नागेंद्र सिंह ने प्रभात खबर डिजिटल से बातचीत में कहा कि यह स्वतंत्रता दिवस राज्य के लिए बेहद खास है. उन्होंने दावा किया कि अब राज्य में केवल नौ नक्सली शेष हैं और उनके खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है.
काले झंडे का दौर हुआ खत्म
आईजी अभियान नागेंद्र सिंह ने कहा कि एक समय झारखंड के कई इलाकों में नक्सली स्वतंत्रता दिवस के मौके पर काले झंडे फहराते थे और तिरंगे का अपमान करते थे. सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए स्कूलों और अन्य स्थानों के आसपास आईईडी तक लगाए जाते थे. लेकिन सुरक्षा बलों के लगातार अभियान के बाद अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. नागेंद्र सिंह ने कहा कि इस बार पहली बार ऐसे माहौल में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया है, जब झारखंड में नक्सली प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है. राज्य के सात प्रमुख नक्सल हॉटस्पॉट अब नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं. सीमावर्ती और कुछ संवेदनशील इलाकों में मौजूद नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है.
29 अप्रैल 2026 का ऑपरेशन बना टर्निंग पॉइंट
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है. आईजी अभियान ने बताया कि 29 अप्रैल 2026 को दुर्दांत नक्सली इसराइल पूर्ति मुठभेड़ में मारा गया. इस घटना के बाद नक्सली संगठन के भीतर बड़ा असर पड़ा और लगातार नक्सलियों ने सरेंडर करना शुरू किया. पुलिस इसे झारखंड में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट मानती है.
सप्लाई चेन कटी तो कमजोर पड़ा संगठन
नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों ने सारंडा के घने जंगलों के अंदर एडवांस लोकेशन कैंप स्थापित किए. इन कैंपों के जरिए सुरक्षा बलों की मौजूदगी उन इलाकों तक बढ़ी, जहां पहले नक्सलियों का प्रभाव था. पुलिस का मानना है कि लगातार ऑपरेशन और एडवांस कैंप की वजह से नक्सलियों की आवाजाही और सप्लाई नेटवर्क पर प्रभाव पड़ा. हथियार, भोजन और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सीमित होने लगी। इसके बाद संगठन के कई सदस्यों ने सरेंडर का रास्ता चुना.
सारंडा के जंगलों में बने एडवांस कैंप
आईजी अभियान के मुताबिक, लगातार ऑपरेशन, मजबूत इंटेलिजेंस नेटवर्क, एडवांस कैंप और सरेंडर पॉलिसी ने मिलकर झारखंड में नक्सलवाद को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अब पुलिस की नजर राज्य में बचे छह नक्सलियों और बंगाल सीमा के पास मौजूद तीन नक्सलियों पर है. पुलिस का दावा है कि जल्द ही इन्हें भी सरेंडर कराने या गिरफ्तार करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी.
दरदरिया घाटी की मुठभेड़ का अनुभव भी साझा किया
आईजी अभियान नागेंद्र सिंह ने पुलिस सेवा के दौरान नक्सल विरोधी अभियानों के अपने अनुभव भी साझा किए. उन्होंने 2009-10 के दौरान लोहरदगा के दरदरिया घाटी में हुई एक घटना का जिक्र किया. उस समय वे गुमला के एसपी के तौर पर तैनात थे. उन्होंने बताया कि नक्सली अभियान के दौरान करीब 40 से 50 जवान नक्सलियों के हमले में फंस गए थे. स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी. नक्सलियों की ओर से हमला किए जाने के बाद जवानों को सुरक्षित बाहर निकालना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती बन गई थी. अभियान के दौरान कई जवान घायल भी हुए. नागेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने ऑपरेशन चलाकर फंसे हुए जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला और कई घायल जवानों की जान बचाई.
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अब सिर्फ 9 नक्सली, जल्द गिरफ्तारी या सरेंडर
आईजी अभियान के मुताबिक, झारखंड में अब केवल नौ नक्सली शेष बचे हैं, जिनकी गिरफ्तारी या सरेंडर कराया जाना बाकी है. पुलिस और खुफिया एजेंसियां इनकी गतिविधियों और मूवमेंट पर लगातार नजर रख रही हैं. जो से इस नक्सलियों में शिक्षित झारखंड में है जबकि तीन नक्सली पश्चिम बंगाल के बॉर्डर इलाके में है, जिनके मूवमेंट पर पुलिस लगातार नजर बनाई हुई है. बचे हुए नक्सलियों के लिए सरकार की सरेंडर नीति का विकल्प खुला है. अगर वे मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं तो सरेंडर कर सकते हैं, अन्यथा सुरक्षा बलों का अभियान जारी रहेगा और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा. आईजी अभियान का दावा है कि झारखंड नक्सलवाद के खात्मे के निर्णायक दौर में पहुंच चुका है और जल्द ही राज्य को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा.
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