नवनिर्मित सूर्य मंदिर में विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन रविवार को विद्वानों के नेतृत्व में यजमानों ने देवताओं का पूजन, अन्नाधिवास, हवन, नगर परिभ्रमण अनुष्ठान किया.
नवनिर्मित सूर्य मंदिर में विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के तीसरे दिन रविवार को विद्वानों के नेतृत्व में यजमानों ने देवताओं का पूजन, अन्नाधिवास, हवन, नगर परिभ्रमण अनुष्ठान किया. इस दौरान सैकड़ों महिला पुरुष रंग गुलाल उड़ाते, नाचते गाते व जयकारा लगाते हुए भगवान भास्कर के प्रतीकात्मक रूप को रथ पर आरूढ़ कर नगर भ्रमण कराया. नगर भ्रमण मंदिर परिसर से शुरू होकर कोइरी टोला, झखरा, महुआ टिकरा, देवी मंडप, इटकी बाजार, महावीर चौक होते हुए बनिया टोला पहुंचा. वहां से पुनः उन्हीं मार्गों से होते हुए सूर्य मंदिर परिसर पहुंच कर समापन किया गया. इधर प्रवचनकर्ता शालिनी त्रिपाठी ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान भास्कर जितने गर्म आग का गोला हैं, उतना ही शांत भी हैं. जो हमें आत्मविश्वास प्रदान करने के साथ हमारे मन की अंधकार को दूर करता है. साथ ही उन्होंने संदेश दिया कि क्रोध करना अनुचित नहीं है, बशर्ते क्रोध से किसी को कष्ट नहीं होनी चाहिए.
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