Ranchi News : सरकार बताये, रोक के बावजूद बिना अनुमति लिये निर्माण के लिए टेंडर कैसे जारी हुआ : हाइकोर्ट

बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पास नाथ बाड़ी की जमीन के मामले में हुई सुनवाई

वरीय संवाददाता, रांची. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस संजय प्रसाद की वेकेशन बेंच ने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पास नाथ बाड़ी की जमाबंदी रद्द करने पर रोक रहने के बावजूद टेंडर जारी करने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की. इस दाैरान अदालत ने प्रार्थी का पक्ष सुना. इसके बाद राज्य सरकार से पूछा कि नाथ बाड़ी की जमीन की जमाबंदी रद्द करने के आदेश पर कोर्ट की रोक रहने तथा यथास्थिति बहाल रखने के बावजूद जमीन पर निर्माण के लिए टेंडर कैसे जारी कर दिया गया. बेंच ने राज्य सरकार को मामले में जवाब दायर करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई नाै जून को होगी. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता कृष्ण मुरारी ने अदालत को बताया कि नाथ बाड़ी की जमीन गिद्दाैर स्टेट की है. वहां ब्रिटिश सरकार के दाैरान 1944 में रहने के लिए धर्मशाला बनी थी. बाद में उसमें गिद्दाैर राजा का परिवार रहने लगा. उसकी देखरेख भागलपुर के कमिश्नर व मुंगेर के डीएम द्वारा की जाती थी. उस जमीन की जमाबंदी भी कायम कर दी गयी थी. लंबे समय से चल रही जमाबंदी को देवघर जिला प्रशासन ने रद्द कर दिया था, जिस पर हाइकोर्ट के जस्टिस केपी देव की अदालत ने रिट याचिका में सुनवाई करते हुए जमाबंदी रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी थी. बाद में जस्टिस राजेश कुमार के कोर्ट ने यथास्थिति बहाल रखी. रोक रहने के बावजूद विगत दिनों बिना अनुमति लिये नाथ बाड़ी की जमीन पर निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया. प्रार्थी द्वारा कराये गये निर्माण को ध्वस्त किया जा रहा है, जो हाइकोर्ट के आदेश की अवमानना है. उन्होंने प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही चलाने का आग्रह किया. वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने प्रस्तुत किया कि श्रावणी मेला के उद्देश्य से और श्रद्धालुओं की सुविधा व कल्याण के लिए सरकार प्रार्थी की भूमि पर केवल अस्थायी संरचनाओं का निर्माण कर रही है. वह इस न्यायालय के समन्वय पीठ (जस्टिस राजेश कुमार) द्वारा डब्ल्यूपी (सी) संख्या-2797/202 में 23 सितंबर 2024 को पारित आदेश का पालन कर रहे हैं. आगे प्रस्तुत किया कि श्रावणी मेला समाप्त होने के बाद उक्त भूमि पर अस्थायी शेड हटा दिया जायेगा. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी राज राजेश्वर प्रसाद सिंह चंदेल ने अवमानना याचिका दायर की है.

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Author: SHRAWAN KUMAR

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