हेमंत सोरेन बताएं- शिबू सोरेन जब जेल गये थे, तब केंद्र और राज्य में किसकी सरकार थी, बाबूलाल का सवाल

झारखंड विधानसभा में भाजपा के नेता बाबूलाल मरांडी ने प्रदेश के मुखिया हेमंत सोरेन से पूछा है कि जब शिबू सोरेन जेल गये थे, तब केंद्र और राज्य में किसकी सरकार थी? श्री मरांडी ने हेमंत सोरेन के आरोपों को तथ्यहीन और निराधार बताते हुए कहा कि हेमंत सोरेन को खुद इस सवाल का जवाब देना चाहिए.

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खनन घोटाला मामले में नोटिस जारी किया, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने आदिवासी मुख्यमंत्री को परेशान करने का आरोप लगाया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया कि विपक्ष उनकी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आरोपों पर झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पलटवार किया है.

हेमंत सोरेन के आरोप तथ्यहीन और निराधार: बाबूलाल मरांडी

झारखंड विधानसभा में भाजपा के नेता बाबूलाल मरांडी ने प्रदेश के मुखिया हेमंत सोरेन से पूछा है कि जब शिबू सोरेन जेल गये थे, तब केंद्र और राज्य में किसकी सरकार थी? श्री मरांडी ने हेमंत सोरेन के आरोपों को तथ्यहीन और निराधार बताते हुए कहा कि हेमंत सोरेन को खुद इस सवाल का जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम करत हैं. एजेंसियों पर न तो किसी का दबाव है, न ही प्रभाव है.

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सत्ता और विपक्ष लोकतंत्र के दो पहिये

बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट करके ये बातें शुक्रवार को कहीं. उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दो पहिये होते हैं. तभी लोकतंत्र की गाड़ी ठीक से चलती है. उन्होंने कहा है कि सत्ता पक्ष सरकार चलाती है और विपक्ष उसे रचनात्मक सहयोग करता है. अगर सत्ता में बैठे लोग अपने रास्ते से भटक जायें, तो विपक्ष की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह सत्ता में बैठे लोगों को सही राह दिखाने की कोशिश करे.

लूटने वाली सरकार को उखाड़ फेंकेंगे

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आज यही काम कर रही है. इससे पहले बाबूलाल मरांडी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि जब तक लूटने वाली सरकार को उखाड़ नहीं फेंकेंगे, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे. उन्होंने कहा कि आदिवासी होने के कारण राज्य को लूटने की छूट हेमंत सोरेन की सरकार को नहीं दे सकते.

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हेमंत सोरेन ने खनिज की लूट रोकने की पहल नहीं की

श्री मरांडी ने कहा कि उन्होंने डेढ़ साल पहले ही सरकार को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें बताया था कि साहिबगंज में खनिज पदार्थों का अवैध खनन हो रहा है. खनिज संपदा की लूट हो रही है. ट्विटर और फेसबुक के साथ-साथ प्रेस के माध्यम से सरकार को आगाह किया, लेकिन सरकार ने उसे गंभीरता से नहीं लिया. उसने लूट की छूट दे रखी थी. उसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया.

एक जिला में एक हजार करोड़ रुपये का घोटाला

उन्होंने कहा कि सरकार के संरक्षण में रात के समय जलमार्ग से माल की ढुलाई के नियम को भी धता बताया गया. बाकायदा माल की ढुलाई होने दी. सिर्फ साहिबगंज में एक हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है. यह कोई मामूली बात नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार लोकतंत्र की मर्यादा से बाहर जा रही है और विपक्ष जो सरकार के काले कारनामे की पोल खोल रही है, उसे डराने और धमकाने की कोशिश करती है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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