झारखंड में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय नीति तय करने के लिए शुक्रवार (11 नवंबर) को बुलाये गये विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विपक्षी दलों को आड़े हाथ लिया. हेमंत सोरेन ने कहा, ‘आपके जैसे बेवकूफ नहीं हैं हम. आदिवासी अब बोका नहीं रहा. यही बोका आपको धो-पोंछकर बाहर फेंक देगा.’
भाजपा को बताया आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक विरोधी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने सदन को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों पर जमकर वार किया. भाजपा को आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया. कहा कि भाजपा नेताओं के बड़े-बड़े कारोबारी दोस्त देश की हजारों करोड़ की संपत्ति लेकर विदेशों में जाकर बस जाते हैं. उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. अगर गांव का किसान कर्ज न चुका पाये, तो उसे जेल में ठूंस दिया जाता है.
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लपेटे में भाजपा और आजसू
मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिये भारतीय जनता पार्टी और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) पार्टी को विचित्र समूह की संज्ञा दी. इतना ही नहीं, उन्होंने विपक्षी दलों को राज्य को बर्बाद करने वाला गिरोह करार दिया. झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि ये लोग षड्यंत्रकारी हैं. ये जब सरकार में थे, तो उनकी सारी नीतियां गलत थीं. उनके सारे बिल फंस जाते थे.
स्थानीय नीति को सभी रोजगार से जोड़ेगी हेमंत सोरेन सरकार
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने जो स्थानीय नीति बनायी है, वह सिर्फ सरकारी नौकरी के लिए नहीं है. अन्य सभी रोजगार से भी इसे जोड़ा जायेगा. इस विधेयक का दायरा बहुत बड़ा है. हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार भाजपा सरकार की तरह लोगों को छलने और ठगने का काम नहीं करती. भाजपा सरकार में नियुक्तियां निकलती थी और कानूनी पचड़े में फंस जाती थी. महागठबंधन की सरकार की नियुक्तियों में कभी कोई पेच नहीं फंसा.
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1932 का खतियान और 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण बिल पास
ज्ञात हो कि हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल की महागठबंधन सरकार ने एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर दो विधेयकों को पारित कराया. ‘झारखंड स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा, परिणामी सामाजिक संस्कृति एवं अन्य लाभ को ऐसे स्थानीय व्यक्ति तक विस्तारित करने के लिए विधेयक 2022’ के जरिये स्थानीय नीति को परिभाषित किया गया है, तो ‘झारखंड पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण संशोधन विधेयक 2022’ के जरिये अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी आरक्षण का रास्ता साफ किया गया है.
