Ranchi news : 42 साल पहले के 2.85 करोड़ बकाया वसूली के लिए एचइसी का अकाउंट फ्रिज

सिविल कोर्ट के नाजिर की टीम ने हटिया स्थित केनरा बैंक पहुंचकर कार्रवाई की

वरीय संवाददाता, रांची. कोर्ट के आदेश पर एक बार फिर 42 साल पुरानी बकाया राशि की वसूली को लेकर एचइसी के केनरा बैंक स्थित बैंक अकाउंट को फ्रिज किया गया है. सोमवार को सिविल कोर्ट के नाजिर जीशान इकबाल की टीम ने हटिया स्थित केनरा बैंक पहुंचकर एचइसी के बैंक अकाउंट को फ्रीज करने की कार्रवाई की. इससे पहले एग्जीक्यूशन मुकदमा 258/ 2022 की सुनवाई करते हुए कॉमर्शियल कोर्ट के स्पेशल जज चंद्रभानु कुमार की अदालत ने बकाया राशि की वसूली को लेकर एचइसी के बैंक अकाउंट को फ्रीज करने का आदेश दिया. एसजी इंटरप्राइजेज की ओर से अधिवक्ता अल्पना बर्मन ने कोर्ट में पक्ष रखा. वर्ष 1980 में एसजी इंटरप्राइजेज नामक कंपनी ने एचइसी में ऑक्सीजन प्लांट को संचालित करने का कार्य आदेश दिया था. 1983 में काम शुरू हो गया था. एचइसी को उस समय 28 लाख रुपये भुगतान करना था. भुगतान नहीं करने के कारण वर्तमान में ब्याज सहित दो करोड़ 85 लाख 88 हजार 320 रुपये एसजी इंटरप्राइजेज को भुगतान करने का निर्देश एग्जीक्यूशन मुकदमे की सुनवाई करते हुए कॉमर्शियल कोर्ट ने दिया है. गौरतलब है कि एक महीने के अंदर चार ऐसे मामले आये हैं, जिसमें बकाया भुगतान के लिए एचइसी का अकाउंट फ्रीज किया गया है तथा लाख रुपये की बकाया राशि बढ़ कर ब्याज सहित करोड़ों की हो गयी है. क्या है मामला वर्ष 1980 में एसजी इंटरप्राइजेज नामक कंपनी को एचइसी में ऑक्सीजन प्लांट संचालित करने का कार्य आदेश मिला था. इसके एवज में एसजी इंटरप्राइजेज ने एचइसी के पक्ष में पांच लाख रुपये का सिक्योरिटी मनी भी जमा किया था. कार्य आदेश प्राप्त होने के आधार पर एसजी इंटरप्राइजेज ने ऑक्सीजन प्लांट को संचालित किया. साथ ही इसके एवज में एचइसी से एसजी इंटरप्राइजेज ने अपनी राशि का दावा किया. लेकिन एचइसी द्वारा एसजी इंटरप्राइजेज को राशि का भुगतान नहीं किया गया. तब वर्ष 2000 में एसजी इंटरप्राइजेज ने राशि की वसूली को लेकर आर्बिट्रेटर के समक्ष मामला दर्ज कराया. सुनवाई के बाद आर्बिट्रेटर ने एचइसी को सिक्योरिटी मनी सहित ऑक्सीजन प्लांट संचालित करने के एवज में 28 लाख रुपये भुगतान का निर्देश दिया. लेकिन एचइसी द्वारा भुगतान नहीं किया गया. तब एसजी इंटरप्राइजेज ने सिविल कोर्ट रांची स्थित कॉमर्शियल कोर्ट में एग्जीक्यूशन मुकदमा दर्ज कराया.

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Author: SHRAWAN KUMAR

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