गंझू परिवार की बच्चियों का नहीं हो रहा नामांकन

चिरवातरी और हरिणलेटा जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र के आदिवासी समाज के गंझू परिवार की किरण और पूजा संसाधन के अभाव में आठवीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही है

प्रतिनिधि, बुढ़मू.

चिरवातरी और हरिणलेटा जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र के आदिवासी समाज के गंझू परिवार की किरण और पूजा संसाधन के अभाव में आठवीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही है. किरण तीन साल और पूजा एक साल से कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बुढ़मू में नामांकन के लिए प्रयासरत हैं. लेकिन इनका नामांकन नहीं हो पा रहा है. परिजनों ने विद्यालय से नामांकन नहीं होने का कारण पूछा तो बताया गया कि आपके घर से पहले से एक-एक बच्ची का नामांकन हुआ है. इस कारण से इनका नामांकन नहीं हो रहा है. इस संबंध में खरवार भोगता समाज विकास संघ बुढ़मू के अध्यक्ष बसारथ गंझू और यूथ अध्यक्ष प्रदीप भोगता ने बताया कि चकमे और हाहे से एक ओबीसी परिवार से दो-दो बच्ची का नामांकन कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बुढ़मू में हुआ है. ऐसे में हमारे समाज की इन दोनों बच्चियों का भी नामांकन होना चाहिए. इससे पहले असनाही गांव निवासी दो अनाथ बच्चियों को भी कोई सरकारी सहायता नहीं मिली और उनके पठन-पाठन की भी समुचित व्यवस्था नहीं की गयी. साथ ही कहा कि हमारे साथ भेदभाव हुआ तो हमारा समाज एकजुट होकर आंदोलन करने को विवश होगा.

बीडीओ ने कहा :

मामले में बीडीओ धीरज कुमार ने बताया कि इस संबंध में जानकारी नहीं है. दोनों बच्चियों को आवेदन देने बोलें, नियम संगत निर्णय लिया जायेगा.

डीइइओ ने कहा :

इस संबंध में डीइइओ विनय कुमार ने बताया कि कक्षा छह में 75 छात्राओं का नामांकन होता है. कक्षा नौ में 75 से संख्या कम होने पर ही किसी अन्य का नामांकन होगा. एक घर से एक छात्रा के नामांकन का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि यदि एक घर से एक से अधिक छात्रा का नामांकन हुआ है तो जांच करायी जायेगी.

चयन कमेटी के समक्ष बात रखें :

वार्डन अनिमा रानी महतो ने कहा कि चयन कमेटी की अनुशंसा से छात्राओं का नामांकन के कस्तूरबा में लिया जाता है. नामांकन संबंधी बात चयन कमेटी के समक्ष रखें.

नामांकन के नियम :

कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में

75 प्रतिशत सीट आदिवासी, हरिजन, ओबीसी और अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित है. 25 प्रतिशत सीट बीपीएल परिवार के लिए आरक्षित है. इसमें एकल परिवार से विद्यालय छोड़ चुकी छात्रा और अनाथ परिवार की बच्ची को प्राथमिकता देना है.

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By KALICHARAN SAHU

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