गढ़वा बालू खनन मामला : एनजीटी ने प्रदूषण बोर्ड को लगायी फटकार, कार्रवाई करने का दिया आदेश

गढ़वा में अवैध बालू खनन मामले में एनजीटी ने झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है और दोषियों पर कार्रवाई करने का सख्त आदेश दिया है।

रांची: गढ़वा जिले के बंशीधर नगर में कथित अवैध बालू खनन मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कोलकाता ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) पर कड़ी टिप्पणी की है. एनजीटी ने जेएसपीसीबी को अवैध खनन करने वालों पर क्षतिपूर्ति लगाने और वसूली करने का निर्देश दिया है.

साथ ही वसूली पर अगली सुनवाई से एक दिन पहले अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. आदेश का पालन नहीं होने पर जेएसपीसीबी के सदस्य सचिव को 15 सितंबर की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा. यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, न्यायिक सदस्य व ईश्वर सिंह विशेषज्ञ सदस्य की पीठ द्वारा पारित किया गया.

जेएसपीसीबी नहीं करता है समय पर कार्रवाई : एनजीटी ने कहा कि जेएसपीसीबी ने अपने जवाब में बताया है कि उल्लंघनकर्ताओं को नोटिस जारी किये गये हैं, लेकिन यह रिकॉर्ड में नहीं है कि नोटिस के आधार पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाने का अंतिम आदेश पारित किया गया या नहीं.

ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी की है कि कई मामलों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नोटिस जारी करने के बाद समय पर कार्रवाई नहीं करता है. सुनवाई से ठीक पहले नया नोटिस जारी कर अतिरिक्त समय की मांग करता है.

क्या है मामला

यह मामला श्री बंशीधर नगर में अवैध बालू खनन से जुड़ी एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान से शुरू हुआ था. आठ मार्च 2024 को प्रकाशित खबर में आरोप लगाया गया था कि क्षेत्र में खुलेआम अवैध बालू खनन हो रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. इसी खबर के आधार पर एनजीटी ने मूल वाद दर्ज कर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत संबंधित विभागों को पक्षकार बनाते हुए जवाब-तलब किया था.

सुनवाई के दौरान विभिन्न विभागों की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया, लेकिन एनजीटी ने पाया कि सतत बालू खनन प्रबंधन दिशा-निर्देश-2016 , प्रवर्तन एवं निगरानी दिशा-निर्देश-2020 तथा सर्वोच्च न्यायालय एवं ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाये गये हैं. इसी कारण ट्रिब्यूनल ने जेएसपीसीबी को प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.


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By Sunil choudhary

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नेशनल गेम के टेंडर में गड़बड़ी, ग्रामीण विद्युतीकरण टेंडर घोटाला, बालू घोटाला और करीब 4,000 करोड़ रुपये के एमएसडी घोटाले जैसे महत्वपूर्ण मामलों को उन्होंने प्रमुखता से उठाया, जिनका व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव रहा. मुख्यमंत्री बीट के साथ ऊर्जा, खनन, औद्योगिक विकास, सरकारी योजनाओं, राजनीति और सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों पर वे लगातार खबरें लिखते रहे हैं.

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सुनील चौधरी को बीबीसी, पैनोस इंटरनेशनल और झारखंड सरकार की फेलोशिप मिल चुकी है. विभिन्न महत्वपूर्ण और खोजी खबरों के लिए उन्हें कई संस्थानों द्वारा कई बार सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है.

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