झारखंड को बिजली का झटका : शहरी क्षेत्र में 35 पैसे, तो ग्रामीण इलाकों में 50 पैसे प्रति यूनिट की हुई वृद्धि

झारखंड में बिजली महंगी हो गई है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 2023-24 के लिए बिजली टैरिफ की घोषणा बुधवार (28 फरवरी) को कर दी.

Jharkhand Hikes Electric Tariff: झारखंड में बिजली महंगी हो गई है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने 2023-24 के लिए बिजली टैरिफ की घोषणा बुधवार (28 फरवरी) को राजधानी रांची में की. इसके मुताबिक, अब झारखंड के उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 35 पैसे अधिक चुकाने होंगे. वहीं, ग्रामीण इलाकों के बिजली उपोभोक्ताओं को प्रति यूनिट 50 पैसे ज्यादा भुगतान करना होगा. साथ ही फिक्स्ड चार्ज भी अब अधिक देना होगा.

ग्रामीण उपभोक्ताओं पर डाला ज्यादा बोझ

ग्रामीण उपभोक्ताओं पर शहरी उपभोक्ताओं से ज्यादा बोझ डाला गया है. ग्रामीण उपभोक्ताओं को पहले प्रति यूनिट 5.80 रुपए का भुगतान करना पड़ता था. इसे बढ़ाकर 6.30 रुपए कर दिया गया है. अब लोगों को इसी दर से बिजली बिल का भुगतान करना होगा. वहीं, शहरी उपभोक्ताओं के बिल में 35 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है. शहरी क्षेत्र में फिक्स्ड चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ग्रामीण क्षेत्र में फिक्स्ड चार्ज में 50 फीसदी की वृद्धि कर दी गई है. ग्रामीण क्षेत्र में उपभोक्ताओं को पहले लोगों को 50 रुपये प्रति माह भुगतान करना होता था, अब 75 रुपये प्रति माह देने होंगे.

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जेबीवीएनएल ने दिया था 2.30 रुपये प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव

झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने नये टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दर प्रति यूनिट 2.30 रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव किया था. जेबीवीएनएल ने फिक्स्ड चार्ज में भी भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था. लेकिन, आयोग ने शहरी क्षेत्रों में फिक्स्ड चार्ज में वृद्धि के प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया. हालांकि, ग्रामीण क्षेत्र में फिक्स्ड चार्ज में 50 फीसदी की वृद्धि करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.

शहरी उपभोक्ता कर रहे थे 6.30 रुपये की दर से भुगतान

यहां बताना प्रासंगिक होगा वर्तमान में शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की को 6.30 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली का भुगतान करना पड़ता है. इसे बढ़ाकर 8.60 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव था. कहा गया था कि यह दर 400 यूनिट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए होगी. 400 यूनिट तक की खपत करनेवाले उपभोक्ताओं को 7.60 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करने का प्रस्ताव किया गया था. लेकिन आयोग ने इन प्रस्तावों को मानने से इंकार कर दिया. शहरी क्षेत्रों के लिए प्रति यूनिट 35 पैसे और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रति यूनिट 50 पैसे वृद्धि को मंजूरी दी.

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डीवीसी ने दिया टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव

डीवीसी ने टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग प्राधिकार को भेजा है. डीवीसी ने 5.97 रुपये प्रति यूनिट की टैरिफ को बढ़ाकर 6.32 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव दिया है. इस प्रस्ताव पर आम लोगों से आपत्तियां भी मांगी गयीं हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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