प्रतिनिधि, सिल्ली.
शिक्षक के अभाव में स्कूलों का हाल-बेहाल है. उत्क्रमित मध्य विद्यालय रामडेरा में ऐसा ही नजारा है. विद्यालय में पहली से आठवीं तक के 148 बच्चे नामांकित हैं. लेकिन नामांकित बच्चों का भविष्य एकमात्र पारा शिक्षक घासी राम महतो के भरोसे है. शिक्षक के अभाव में यहां बच्चे ही क्लास लेते हैं. ऐसा लगभग रोज दिन ही होता है. शुक्रवार को पड़ताल किया गया तो पता चला कि पिछले सात महीने से यही स्थिति है. स्कूल में चार कमरों में क्लास चलता है. स्मार्ट क्लास भी है. एफएलएन के तहत कक्षाएं चलती हैं. सारी व्यवस्था अकेले ही श्री महतो को संभालनी पड़ती है. प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि वे 2012 से ही प्रभार में हैं. बीच में कुछ वर्षों के लिए एक शिक्षक आये थे, वे भी अब अगस्त महीने से रांची में प्रतिनियुक्त हैं.आठवीं की नीतू लेती है कक्षा :
शिक्षक के अभाव में पहले से पांचवीं तक की कक्षा विद्यालय की आठवीं की छात्रा नीतू कुमारी लेती है. शुक्रवार को प्रभात खबर के प्रतिनिधि स्कूल गये तो वह हिंदी पढ़ा रही थी. नीतू ने बताया कि उसे सप्ताह में कई बार क्लास लेनी पड़ती है.सिर्फ अपनी सुविधा देखते हैं शिक्षक :
शिक्षकों के अभाव में एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में स्कूल की पढ़ाई बाधित न हो इसलिए शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया जाता है. लेकिन इस व्यवस्था का उपयोग सिल्ली के शिक्षक स्कूल की बजाय अपने हित में करते हैं. पैरवी लगवाकर अपनी प्रतिनियुक्ति ऐसी जगह कराने का प्रयास करते हैं, जहां से उनकी ड्यूटी कम से कम मेहनत में आराम से कट सके. इसमें अगर किसी स्कूल के बच्चों की पढ़ाई बाधित हो तो इसकी परवाह उन्हें कतई नहीं है.क्या कहते हैं डीएसई :
डीएसई बादल राज ने कहा कि शिक्षा विभाग में ही शिक्षक की कमी है. इससे कई स्कूलों में पठन-पाठन की समस्या हो रही है. लेकिन ऐसे स्कूल जहां शिक्षकों की बहुत जरूरत है, वहां अविलंब शिक्षकों की व्यवस्था की जायेगी.हाल बेहाल. 148 छात्र-छात्राओं का भविष्य सिर्फ एक पारा शिक्षक के भरोसे
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