फादर कामिल बुल्के की जयंती पर गूंजी कविता और गीत, ‘दूसरी आवाज’ विशेषांक का लोकार्पण

रांची में फादर कामिल बुल्के की जयंती पर ऑनलाइन साहित्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें दूसरी आवाज पत्रिका के हिंदी दिवस विशेषांक का लोकार्पण किया गया।

रांची: झारखंड साहित्य संस्कृति मंच की ओर से मंगलवार को हिंदी साहित्य के अनन्य साधक, तुलसी और वाल्मीकि के भक्त तथा पद्मभूषण फादर कामिल बुल्के की जयंती के अवसर पर ऑनलाइन साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया गया. फादर बुल्के मंच के संस्थापकों में से एक और इसके प्रथम संरक्षक रहे थे.

इस अवसर पर मंच के मानद सदस्य हिमकर श्याम द्वारा संपादित पाक्षिक पत्रिका ‘दूसरी आवाज’ के हिंदी दिवस विशेषांक का ऑनलाइन लोकार्पण किया गया. गोष्ठी में डॉ. गीता सिन्हा ‘गीतांजलि’ ने फादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आलेख प्रस्तुत किया. वहीं डॉ. सुरिन्दर कौर ‘नीलम’ ने घनाक्षरी छंद में फादर बुल्के को समर्पित रचना प्रस्तुत की.

इसके बाद असित कुमार, अनिता रश्मि, अर्पणा सिंह, हिमकर श्याम, डॉ. वैद्यनाथ मिश्र, राज रामगढ़ी, सुजाता प्रिय, रेणु झा, गीता चौबे, डॉ. उर्मिला सिन्हा, बिनोद सिंह ‘गहरवार’, पूनम वर्मा, कृष्णा विश्वकर्मा और सुनीता अग्रवाल ने कविता, गीत एवं दोहों का पाठ किया. राजीव शर्मा ने भारतीय संविधान में रामत्व की अवधारणा पर अपने विचार रखे.

‘हिंदी साहित्य को समृद्ध किया’

कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने की. उन्होंने कहा कि फादर कामिल बुल्के ‘रामकथा’ के अन्वेषक और हिंदी के अनन्य साधक थे. उन्होंने अपनी कर्मभूमि को आत्मभूमि बनाकर हिंदी साहित्य को समृद्ध किया.

कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन पूनम वर्मा ने किया. डॉ. उर्मिला सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ साहित्य गोष्ठी का समापन हुआ.

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By Lata rani

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