कल्पना सोरेन की जीत के बाद, झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन पर क्या बोले डाॅ रामेश्वर उरांव

कांग्रेस कोटे के मंत्रिपद को लेकर डाॅ रामेश्वर उरांव ने कहा कि अभी इसपर कोई बात नहीं हुई है, हालांकि पद खाली है तो उसे भरा जाना चाहिए.

Kalpana Soren :विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, संभव है कि नवंबर में चुनाव हो जाए और उसके लिए चुनावी प्रक्रिया पहले से शुरू हो जाएगी, इसलिए मुझे नहीं लगता है कि इन हालात में झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन होगा. चंपाई सोरेन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं और सभी उन्हें सहयोग भी कर रहे हैं. कल्पना सोरेन चुनाव जीतकर आई हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि नेतृत्व परिवर्तन होगा. उक्त बातें झारखंड के वित्तमंत्री डाॅ रामेश्वर उरांव ने प्रभात खबर के साथ विशेष बातचीत में कही.डाॅ रामेश्वर उरांव ने कहा कि इस बार का चुनाव किसी खास व्यक्ति के नेतृत्व में नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि हम झामुमो के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे, इसकी वजह यह है कि प्रदेश में हमारा गठबंधन है और झामुमो एक बड़ी पार्टी है. सब साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे और निश्चित तौर पर हमें सफलता मिलेगी.

कांग्रेस कोटे का मंत्रिपद भरने पर अभी नहीं हुई बात

आलमगीर आलम के इस्तीफे के बाद कांग्रेस कोटे का जो मंत्रिपद खाली हुआ है उसे भरने को लेकर रामेश्वर उरांव ने कहा कि यह जरूर होना चाहिए, जो पद खाली हैं, उन्हें भरा जाना चाहिए. लेकिन अगर हम यह कहें कि किसी खास व्यक्ति के नाम पर चर्चा हुई है या सहमति बनी है तो अभी तक किसी नाम पर चर्चा पार्टी में नहीं हुई है. केंद्र सरकार के भविष्य पर बात करते हुए डाॅ रामेश्वर उरांव ने कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल और तीसरे कार्यकाल में फर्क तो है ही और यह सबको पता है कि बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं है. ऐसे में सरकार पर अंकुश तो होगा ही, जहां तक बात सरकार के भविष्य की है, तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकार चलेगी क्योंकि एनडीए को बहुमत है और घटक दल मिलकर सरकार चला लेंगे.

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मैं अभी थका नहीं हूं पार्टी की सेवा में समर्पित हूं

विधानसभा चुनाव में अपनी भूमिका पर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह तो पार्टी तय करेगी कि मुझे किस भूमिका में रखना है. मैंने अभी कुछ तय नहीं किया है, मैं पार्टी की सेवा में हूं, जो आदेश होगा वो करूंगा. हां, यह बात तो है कि मैं अभी थका नहीं हूं और चुनाव लड़ने से मुझे कोई परहेज भी नहीं है. अभी मैं पार्टी को सेवा देने के लिए तत्पर हूं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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