कृषि योजनाओं की धीमी प्रगति पर एक्शन मोड में निदेशक, 17 करोड़ के ग्रामीण हाट से लेकर फसल रक्षक तक दिए निर्देश

कृषि निदेशालय के निदेशक बिद्यानंद शर्मा ने विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए असंतोष जताया. उन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. फसल रक्षक नियुक्ति, मिलेट मिशन और ग्रामीण हाट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की उम्मीद है.

रांची. कृषि निदेशालय की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं की भौतिक और आर्थिक प्रगति की समीक्षा के दौरान निदेशक बिद्यानंद शर्मा ने असंतोष जताया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

फसल रक्षक नियुक्ति के मामले में सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजने का निर्देश दिया गया. इस संबंध में 18 सितंबर को जिला स्तरीय बैठक होगी. बिरा बीज उत्पादन, विनिमय एवं वितरण योजना के तहत जिलों को उपलब्ध करायी गयी राशि खर्च नहीं होने पर भी निदेशक ने नाराजगी जतायी. उन्होंने मुख्यालय के अधिकारियों को जिलों के संबंधित अधिकारियों से नियमित समन्वय करने का निर्देश दिया.

कृषि मेला और प्रशिक्षण योजनाओं में खर्च की स्थिति पर असंतोष

कृषि मेला, कार्यशाला, प्रत्यक्षण और प्रशिक्षण योजनाओं में खर्च की स्थिति संतोषजनक नहीं पायी गयी. निदेशक ने जून में आयोजित कृषि व्यापार मेले से संबंधित भुगतान जल्द करने का निर्देश दिया.

हर सप्ताह योजनाओं की समीक्षा करें समेति

निदेशक ने मिलेट मिशन के तहत क्रॉप सर्वे में तेजी लाने और वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए जिलों को रिमाइंडर भेजने का निर्देश दिया. समेति की योजनाओं में असंतोषजनक व्यय को देखते हुए सभी उपायुक्तों को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए पत्र जारी करने को कहा गया. साथ ही जिला कृषि पदाधिकारियों के साथ हर सप्ताह समीक्षा करने का निर्देश दिया.

कृषि पाठशाला योजना में कम वित्तीय उपलब्धि पर उप कृषि निदेशक (सा) को स्थिति की समीक्षा कर अद्यतन रिपोर्ट सौंपने को कहा गया. वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए इंट्रेस्ट सबवेंशन योजना का प्रस्ताव तैयार कर बैंकों को भेजने का आदेश दिया गया.

17 करोड़ के ग्रामीण हाट प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए भेजने का निर्देश

ग्रामीण हाट बाजारों के सुदृढ़ीकरण और आधारभूत संरचना से संबंधित 17 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए प्रस्तुत करने को कहा गया. निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी योजना में पूरी आवंटित राशि खर्च करना संभव नहीं हो, तो बची हुई राशि के प्रत्यर्पण का प्रस्ताव तैयार किया जाये.

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By Manoj Kumar Singh

मनोज सिंह प्रभात खबर में बतौर मुख्य संवाददाता कार्यरत है. पत्रकारिता में उनका 26 साल का अनुभव है. दैनिक हिन्दुस्तान में करीब आठ साल काम करने के बाद वह प्रभात खबर से जुड़े हैं. कृषि, पशुपालन, सहकारिता, वन, जलवायु परिवर्तन, आजीविका, मनोरोग, कोयला संबंधी खबरों में वर्षों काम करने का अनुभव है.

आइआइटी कानपुर से जस्ट ट्रांजिशन विषय पर फेलोशिप प्राप्त करने वाले देश के पहले संवाददाता है. उनको दो बार एग्रई जर्निलिज्म अवार्ड मिल चुका है. झारखंड सरकार के वन विभाग से तिलका मांझी अवार्ड मिला है. कई मचों पर वह प्रभात खबर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा ले चुके हैं.


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