रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में जेएलकेएम के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो की कथित पिटाई के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में सरकार का पक्ष सुना. इस दौरान राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के पूर्व के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट ने नाराजगी जतायी.
खंडपीठ ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को अवमानना नोटिस जारी करते हुए पूछा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाये. कोर्ट ने डीजीपी को इस मामले में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.
चार सप्ताह में सभी थानों में लगायें CCTV कैमरे
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर झारखंड के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी इस आदेश को गंभीरता से लेने को कहा है. खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से संबंधित पूर्व के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
मेडिकल अफसर पर कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से पूछा था कि तरुण महतो को कोर्ट में पेश किये जाने के समय 'फिट फॉर कस्टडी' का प्रमाण पत्र देने वाले मेडिकल अफसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी. गुरुवार की सुनवाई में सरकार की ओर से इस संबंध में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया. इस पर भी खंडपीठ ने नाराजगी जतायी. वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें, इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी.
क्या है मामला
ईचागढ़ पुलिस ने 19 नवंबर 2025 की रात जेएलकेएम के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो को कथित तौर पर उनके घर से उठाकर थाना ले गयी थी. आरोप है कि थाना में उनकी बेरहमी से पिटाई की गयी. घटना के बाद तरुण महतो की पत्नी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले की शिकायत की थी. पत्र पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी.
