रांची के CIP को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने की दिशा में केंद्र की पहल तेज, आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा संस्थान

केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP), रांची को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं। बजट घोषणा के अनुरूप संस्थान को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद है।

रांची. केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआइपी), रांची को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार ने अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है. राज्यसभा सांसद डॉ प्रदीप कुमार वर्मा द्वारा शून्यकाल में यह मुद्दा उठाये जाने के बाद आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने पत्र भेजकर इस संबंध में जानकारी दी है.

केंद्रीय बजट की घोषणा के अनुरूप हो रहा काम

मंत्री की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार, केंद्रीय बजट में की गयी घोषणा के अनुरूप सीआइपी रांची के विकास और उन्नयन से जुड़े सभी पहलुओं पर तेजी से काम किया जा रहा है. संस्थान को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पर भी काम चल रहा है.

643 बेड वाले संस्थान को आधुनिक सुविधाओं से किया जायेगा लैस

वर्ष 1918 से मानसिक स्वास्थ्य उपचार, शोध और प्रशिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे सीआइपी में वर्तमान में 643 बेड हैं. उन्नयन के बाद संस्थान को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में काम किया जायेगा. इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, उपचार और शोध के क्षेत्र में संस्थान की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.

विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण को मिलेगी गति

डॉ प्रदीप कुमार वर्मा ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि सीआइपी के उन्नयन से झारखंड समेत पूरे देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी. साथ ही अत्याधुनिक उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण को भी नयी गति मिलने की उम्मीद है.

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By सतीश सिंह

मीडिया जगत में 25 से अधिक वर्षों का वृहद और समृद्ध अनुभव रखने वाले सतीश सिंह निष्पक्षता, तथ्यात्मकता और खोजी पत्रकारिता के पर्याय हैं. 'प्रभात खबर' के प्रमुख संवाददाता के रूप में अपनी 22 वर्षों की लंबी और समर्पित यात्रा के दौरान उन्होंने हमेशा सत्य और सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता दी है. रांची में रहते हुए उन्होंने लगातार 15 वर्षों तक झारखंड हाइकोर्ट की रिपोर्टिंग की, जहां न्याय प्रणाली, संवैधानिक पेचीदगियों और जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों को बेहद सरलता और गहराई के साथ पाठकों तक पहुंचाया. वर्तमान में वह झारखंड की राजनीति, प्रशासनिक फैसलों, नीतिगत सुधारों और विभागीय कार्यप्रणालियों की गहन रिपोर्टिंग कर रहे हैं. उनके लेखन का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक व प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति समाज को जागरूक करना और पाठकों को सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणपरक समाचार उपलब्ध कराना है.

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