CBSE 12th Result: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के अंकों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है. इसके तहत रांची के चार प्रतिष्ठित स्कूलों को विशेष मूल्यांकन केंद्र के रूप में चुना गया है. इन केंद्रों पर विद्यार्थियों द्वारा दायर अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन संबंधी आवेदनों की जांच की जाएगी. सीबीएसई का मानना है कि इस नई व्यवस्था से छात्रों की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित होगा तथा मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मजबूत होगी.
रांची के चार प्रमुख स्कूल बने स्पेशल सेंटर
सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय ने रांची के चार प्रमुख स्कूलों को इस कार्य के लिए चयनित किया है. इनमें दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), केरली स्कूल, डीएवी हेहल और सरला बिरला पब्लिक स्कूल शामिल हैं. इन सभी स्कूलों को बोर्ड की ओर से आवश्यक तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया गया है. सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा नहीं आनी चाहिए.
हर केंद्र पर 50 कंप्यूटर और हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था
बोर्ड ने प्रत्येक चयनित केंद्र को कम से कम 50 कंप्यूटर उपलब्ध रखने का निर्देश दिया है. साथ ही निर्बाध और उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सुविधा सुनिश्चित करने को कहा गया है. सीबीएसई के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, अंकों का सत्यापन और री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया अब बड़े पैमाने पर डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है. ऐसे में मजबूत तकनीकी व्यवस्था आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों के आवेदन समय पर और बिना किसी त्रुटि के निपटाए जा सकें.
विभिन्न विषयों के 40 शिक्षकों की होगी तैनाती
मूल्यांकन कार्य को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए बोर्ड ने प्रत्येक सेंटर पर विभिन्न विषयों के कम से कम 40 योग्य शिक्षकों की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है. उत्तर पुस्तिकाओं की संख्या और विषयों की आवश्यकता के अनुसार शिक्षकों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है. इन शिक्षकों की जिम्मेदारी अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं की गहन जांच करना होगा. सीबीएसई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्यार्थी के साथ मूल्यांकन संबंधी अन्याय न हो और यदि किसी प्रकार की त्रुटि हुई है तो उसे समय रहते सुधारा जा सके.
मोबाइल फोन ले जाने पर रहेगा प्रतिबंध
बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया की गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी मूल्यांकन कार्य में शामिल शिक्षकों को सेंटर के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी. सीबीएसई का मानना है कि इससे उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया की गोपनीयता बनी रहेगी तथा किसी भी प्रकार की बाहरी हस्तक्षेप या अनियमितता की संभावना समाप्त होगी.
दो शिक्षकों द्वारा होगी क्रॉस चेकिंग
मूल्यांकन की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ने प्रत्येक उत्तर पुस्तिका की जांच के बाद दो शिक्षकों द्वारा क्रॉस चेकिंग की व्यवस्था लागू की है. इस प्रक्रिया के तहत एक शिक्षक द्वारा की गई जांच को दूसरे शिक्षक द्वारा पुनः सत्यापित किया जाएगा. इससे अंक जोड़ने, उत्तरों के मूल्यांकन या अन्य तकनीकी त्रुटियों की संभावना काफी कम हो जाएगी. सीबीएसई अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने और मूल्यांकन प्रक्रिया में भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
क्षेत्रीय कार्यालय करेगा पूरी प्रक्रिया की निगरानी
सीबीएसई ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी क्षेत्रीय कार्यालय के एक अधिकृत अधिकारी द्वारा की जाएगी. यह अधिकारी मूल्यांकन अवधि के दौरान केंद्रों पर उपस्थित रहकर सभी गतिविधियों पर नजर रखेगा. अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि अंकों के सत्यापन और री-इवैल्यूएशन का कार्य निर्धारित मानकों, दिशा-निर्देशों और समय-सीमा के अनुरूप पूरा हो. यदि किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाएगा.
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विद्यार्थियों को मिलेगा निष्पक्ष मूल्यांकन का भरोसा
सीबीएसई की इस पहल को विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है. अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की पारदर्शी व्यवस्था से छात्रों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है. बोर्ड का मानना है कि तकनीकी संसाधनों, विशेषज्ञ शिक्षकों और बहुस्तरीय जांच व्यवस्था के माध्यम से मूल्यांकन प्रक्रिया की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सकता है. इससे छात्रों की शिकायतों का समाधान तेजी से होगा और परीक्षा प्रणाली पर उनका विश्वास और मजबूत होगा.
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