रांची में मनाया गया संत मदर तेरेसा का पर्व, फादर प्रफुल्ल ने बताया प्रेम और सेवा का संदेश

रांची में कैथोलिक समुदाय ने मदर तेरेसा का पर्व मनाया। फादर प्रफुल्ल बड़ा ने उनके जीवन से प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया।

प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट रांची : कैथोलिक विश्वासी शुक्रवार को कोलकाता की संत मदर तेरेसा का पर्व मना रहे हैं. इस अवसर पर संत अलबर्ट्स कॉलेज के फादर प्रफुल्ल बड़ा ने अपने दैनिक प्रवचन में मदर तेरेसा के जीवन और उनके संदेश का महत्व बताया.

फादर प्रफुल्ल बड़ा ने कहा कि संत मदर तेरेसा ने अपना पूरा जीवन गरीबों, अनाथों और मरणासन्न लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया. उनका जीवन हमें सिखाता है कि प्रेम और दया दुनिया के किसी भी नियम से ऊपर है.

नियमों से ज्यादा जरूरी है मानवता

फादर प्रफुल्ल बड़ा ने सुसमाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि फरीसी धार्मिक नियमों और रीति-रिवाजों का कड़ाई से पालन करते थे. वे खुद को धर्मी मानते थे और दूसरों की कमियां निकालते थे. उन्होंने बताया कि सुसमाचार के अनुसार जब यीशु के शिष्य विश्राम के दिन गेहूं के खेत से होकर जा रहे थे, तो उन्होंने गेहूं की बालियां तोड़कर खाईं. फरीसियों ने यह नहीं देखा कि शिष्य भूखे थे, बल्कि उन्होंने उन पर धार्मिक नियम तोड़ने का आरोप लगाया.

प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा का रास्ता

फादर प्रफुल्ल ने कहा कि कई बार हम भी फरीसियों की तरह व्यवहार करते हैं. हम दूसरों की गलतियों पर बिना पूरी बात समझे आरोप लगाने लगते हैं. ऐसे में मदर तेरेसा का जीवन हमें दूसरों की कमियां निकालने के बजाय प्रेम, करुणा और निस्वार्थ सेवा का रास्ता अपनाने की प्रेरणा देता है.

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असहायों की सेवा कर रही मिशनरीज ऑफ चैरिटी

रांची में संत मदर तेरेसा की संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी की कई शाखाएं हैं. यहां संस्था की धर्मबहनें कुष्ठ रोगियों, गरीबों और असहाय लोगों की सेवा कर रही हैं. मदर तेरेसा के पर्व के अवसर पर उनके सेवा और समर्पण के जीवन को याद करते हुए लोगों से जरूरतमंदों की मदद करने और मानवता की सेवा के लिए आगे आने का संदेश दिया गया.

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लेखक के बारे में

By विकाश नाथ

26 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हूं. रिपोर्टिंग के साथ डेस्क का काम करने भी अनुभव प्राप्त है. खेल डेस्क में भी काम करने का अनुभव है. रुरल के संस्करणों को देखता हूं.

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