रांची: ब्रेन डेड मरीज के अंगदान से आठ से नौ लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है. सड़क दुर्घटना, ब्रेन स्ट्रोक या मस्तिष्क की गंभीर बीमारी के कारण ब्रेन डेड होने वाले मरीजों के परिजनों को अंगदान के लिए जागरूक किया जा सकता है. इसके लिए चार डॉक्टरों की टीम द्वारा दो बार जांच के बाद मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया जाता है. इसके बाद परिजनों से अंगदान की सहमति ली जा सकती है.
यह जानकारी नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के निदेशक डॉ अनिल कुमार ने दी. वह गुरुवार को होटल BNR में SOTO (ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे.
एक व्यक्ति के अंगदान से कई मरीजों को मिल सकता है जीवन
डॉ अनिल कुमार ने बताया कि एक ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से कई जरूरतमंद मरीजों को जीवन मिल सकता है. दो किडनी से दो मरीजों, दो फेफड़ों से दो मरीजों को लाभ मिल सकता है. वहीं हार्ट से एक मरीज और लिवर से एक या दो मरीजों की जान बचायी जा सकती है. पैंक्रियाज का प्रत्यारोपण कर एक अन्य मरीज को भी लाभ पहुंचाया जा सकता है. इसके अलावा कॉर्निया दान से एक या दो लोगों की आंखों की रोशनी लौटायी जा सकती है.
उन्होंने कहा कि देश में बीमारी से होने वाली मौत के बाद अंग प्रत्यारोपण की तुलना में ब्रेन डेड मरीजों से अंगदान का आंकड़ा काफी कम है. आबादी के एक फीसदी से भी कम लोगों के अंग ब्रेन डेड होने के बाद दान किये जाते हैं. झारखंड में भी अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.
झारखंड में अब तक पांच किडनी ट्रांसप्लांट
कार्यक्रम में बताया गया कि झारखंड में अंगदान की स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है. राज्य में अब तक एक अस्पताल में पांच किडनी ट्रांसप्लांट किये गये हैं. डॉक्टरों ने कहा कि अंगदान को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर करने और परिवारों को इसके महत्व की जानकारी देने की जरूरत है.
अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा और रिम्स निदेशक डॉ डीके सिन्हा ने भी अंगदान के महत्व और इसकी जरूरत पर प्रकाश डाला. डॉ रजत चौधरी और डॉ दिब्यांशु सरकार ने अंगदान से पहले की जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी दी.
कार्यक्रम के दौरान दो पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसमें अंगदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई. संचालन साल्विया शार्ली ने किया. मौके पर डॉ प्रदीप भट्टाचार्य, डॉ प्रज्ञा पंत, डॉ शिव प्रिये, डॉ अजय कुमार, डॉ पंकज मिश्रा, डॉ विजय कुमार सिंह सहित कई डॉक्टर और सहिया मौजूद थीं.
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