डकरा. नौ सूत्री मांगों को लेकर बिहार कोलियरी कामगार यूनियन (बीसीकेयू) ने गुरुवार को केडीएच कोयला खदान को एक पाली पूरी तरह बंद करा दिया. जो प्रबंधन दो दिन पहले तक यूनियन की मांग को तवज्जो नहीं दे रहा था, वही प्रबंधन गुरुवार की सुबह से वार्ता के लिए पेशकश करती नजर आयी और जब एक पाली का काम पूरी तरह बंद रहा, तब वार्ता के टेबल पर बनी सहमति के बाद यूनियन ने आंदोलन को स्थगित कर दिया. इसके बाद परियोजना का काम शुरू किया जा सका. इसके पहले यूनियन के सीसीएल अध्यक्ष बसंत कुमार और जोनल अध्यक्ष रतिया गंझू के नेतृत्व में सुबह खदान पहुंच कर बीच रास्ते में झंडा गाड़ कर वहीं बैठ गये. सीआइएसएफ के जवान मौके पर पहुंच कर तमाशबीन बने रहे. किसी अधिकारी को खदान के भीतर प्रवेश करने नहीं दिया गया. नेताओं का कहना था कि 40 साल केडीएच चल गया और आज तक यहां के रैयत विस्थापित को बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराया गया है. संगठन और यूनियन के नाम पर जो लोग प्रबंधन की दलाली कर रहे हैं, सिर्फ उनकी सुनी जाती है, लेकिन जो जनसाधारण के हक अधिकार की बात करता है, उसको कोई महत्व नहीं दिया जाता है. प्रबंधन में बैठे लोगों की इस मनमानी से परेशान होकर आज जमीन पर उतर कर आंदोलन का निर्णय करना पड़ा है. बाद में महाप्रबंधक कार्यालय में हुई वार्ता के बाद आंदोलन को स्थगित किया गया. इस अवसर बसंत कुमार, धनेश्वर तुरी, रतिया गंझू, इरफान खान, तौहीद अंसारी, सोनू गंझू, अमर भोक्ता, दर्शन गंझू,फारुख नवाब, नांदो देवी, किरण मिंज, भारती देवी, मानो देवी, लक्ष्मी देवी, वीणा देवी, मुनिया देवी, आशीष शर्मा, रजीदा खातून, वाजिद अंसारी, सरफुद्दीन अंसारी, जुनैद आलम, मुस्तरी बेगम, अर्जुन गंझू, ललिता देवी, सोनू कुमार साव, सुखारी उरांव, पर्याग साव, जगनारायण साव, अर्जुन सिंह आदि मौजूद थे.
वार्ता में बनी सहमति
निर्णय लिया गया कि यूनियन की जो नौ सूत्री मांग है, उसके आलोक में एक कमेटी बना कर उसका समाधान करने की दिशा में काम करेगी. कमेटी में स्थानीय रैयत-विस्थापित को भी शामिल किया जायेगा. अधिग्रहित जमीन का अविलंब निष्पादन किया जायेगा.किसी अधिकारी को खदान के भीतर प्रवेश करने नहीं दिया गया
वार्ता में बनी सहमति के बाद यूनियन ने आंदोलन को स्थगित
यूनियन की नौ सूत्री मांगों के समाधान के लिए कमेटी का गठन
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