बालू, ईंट भट्ठा, कोयला व जमीन के कारोबार में रंगदारी के पैसे लगा रहा अमन साहू गैंग

पलामू जेल में बंद गैंगस्टर अमन साहू और उसका गिरोह रंगदारी के पैसे का निवेश बालू, ईंट भट्ठा, कोयला व जमीन के धंधे में करता है. यह खुलासा रांची के ओरमांझी पुलिस के हत्थे चढ़ा साहू गिरोह के गुर्गे प्रमोद कुमार सिंह ने किया है.

पलामू जेल में बंद गैंगस्टर अमन साहू और उसका गिरोह रंगदारी के पैसे का निवेश बालू, ईंट भट्ठा, कोयला व जमीन के धंधे में करता है. यह खुलासा रांची के ओरमांझी पुलिस के हत्थे चढ़ा साहू गिरोह के गुर्गे प्रमोद कुमार सिंह ने किया है. उसने बताया है कि अमन साहू का संबंध कुछ बड़े नेताओं, बिल्डरों, ठेकेदारों से भी है. साहू गैंग के चंदन साव ने रंगदारी से वसूले गये 35 लाख रुपये प्रमोद कुमार सिंह को निवेश करने के लिए दिये थे. प्रमोद ने वह पैसा रामगढ़ जिले के पतरातू स्थित दामोदर नदी बालू घाट में लगाया था. उससे जितना फायदा हुआ, उसमें से अपना कमीशन काट कर अमन साहू का हिस्सा पहुंचा दिया था. जेल से बाहर अमन साहू का भाई आकाश साहू व चंदन साव का भाई टिंकू साव गैंग चलाते हैं. इसमें साहू गिरोह का शूटर राजा अंसारी (जयनगर, रामगढ़), राहुल दुबे (ट्रांसपोर्ट नगर कुजू, रामगढ़) और जगत साहू उर्फ लक्खी साहू (कृष्णापुरी, चुटिया, रांची) रंगदारी के लिए फायरिंग कर लोगों को धमकाने का काम करते हैं. प्रमोद के अनुसार, अमन साहू गिरोह के लिए बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व बंगाल से सिम कार्ड, बाइक, हथियार व गोली की व्यवस्था होती है. यह गिरोह पलामू, चतरा, लोहरदगा, हजारीबाग, रांची, खूंटी, चाईबासा, सरायकेला, गिरिडीह व धनबाद में सक्रिय है.

चंदन साव ने बिरसा मुंडा जेल से प्रमोद को किया था फोन :

पुलिस को दिये बयान में प्रमोद कुमार सिंह ने यह स्वीकार किया है कि रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद चंदन साव ने उससे व्हाट्सऐप पर बात की थी. इसके लिए चंदन ने जेल से 9234984494 नंबर से प्रमोद के मोबाइल नंबर 83403707904 नंबर पर व्हाट्सऐप कॉल कर ओरमांझी में भारत माला प्रोजेक्ट पर घटना को अंजाम देने के लिए कहा था. इस गिरोह का सुनील सिंह मीणा ही मयंक सिंह बन कर फोन पर धमकी देने का काम करता है. प्रमोद के मुताबिक, गिरोह के सदस्य जेल प्रशासन को मैनेज कर पलामू जेल में अमन साहू और रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में चंदन साव के पास मोबाइल पहुंचाते हैं. उल्लेखनीय है कि जेल से बदमाशों द्वारा गिरोह को संचालित करने का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं.

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