गाड़ियों की नीलामी के मामले में हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों की कार्यशैली पर जतायी कड़ी नाराजगी

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने अवैध खनन मामले में जब्त वाहन की नीलामी को लेकर राज्य सरकार और अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने मुख्य सचिव को मामले की समीक्षा का निर्देश देते हुए पूछा कि लंबित याचिका के बावजूद वाहन जल्दबाजी में क्यों बेचा गया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने खनन कानूनों के तहत प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने स्पष्ट कहा कि आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान होना चाहिए, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक देरी की जा रही है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के रवैये पर तीखी टिप्पणी की.

सरकार से मांगा गया जवाब

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले में अतिरिक्त समय की मांग की गई. इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से कहा कि सरकार को मामले के समाधान के साथ अदालत में उपस्थित होना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय समय मांगा जा रहा है. खंडपीठ ने कहा कि अदालत आम नागरिकों की समस्याओं का जल्द समाधान चाहती है, लेकिन सरकार ऐसे मामलों में समस्या खत्म करने के बजाय प्रक्रिया को लंबा खींचती है. अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की निगरानी करने का निर्देश दिया.

मुख्य सचिव को दिया एक माह का समय

हाइकोर्ट ने मामले के समाधान के लिए राज्य सरकार को एक माह का समय दिया है. अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे पूरे मामले की समीक्षा करें और अगली सुनवाई तक उचित समाधान प्रस्तुत करें. खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है.

तत्कालीन उपायुक्त पर भी जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि प्रशिक्षण में व्यस्त रहने के कारण वे पूर्व में अदालत में उपस्थित नहीं हो सके थे. इस पर खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जिनके कारण यह समस्या उत्पन्न हुई, उनके स्तर पर अब तक समाधान क्यों नहीं निकाला गया. अदालत ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए.

रिवीजन याचिका लंबित रहने के बावजूद हुई नीलामी

मामले में अदालत ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि अवैध खनन परिवहन मामले में जब्त किए गए वाहन की जल्दबाजी में नीलामी कर दी गई. खंडपीठ ने कहा कि जब इस मामले में रिवीजन याचिका लंबित थी, तब प्रार्थी को पर्याप्त अवसर दिए बिना वाहन की नीलामी कर तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करना उचित नहीं माना जा सकता. अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी जल्दबाजी में वाहन को कम कीमत पर क्यों बेच दिया गया.

चोरी के बाद अवैध खनन मामले में पकड़ा गया था हाइवा

मामले में प्रार्थी अशोक सिंह की ओर से याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने अदालत में पक्ष रखा. याचिका में कहा गया है कि प्रार्थी का हाइवा गया जिले से चोरी हो गया था. वाहन चोरी की प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी. बाद में वही हाइवा अवैध खनन परिवहन के दौरान बालूमाथ क्षेत्र में पकड़ा गया. आरोप है कि इसके बाद लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव ने जब्त हाइवा की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी और वाहन को काफी कम कीमत पर किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दिया.

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17 जून को होगी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई के लिए हाइकोर्ट ने 17 जून की तिथि निर्धारित की है. अदालत अब राज्य सरकार और प्रशासन से विस्तृत जवाब की प्रतीक्षा कर रही है. इस मामले को लेकर कानूनी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. माना जा रहा है कि हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जब्त वाहनों की नीलामी प्रणाली की गहन समीक्षा हो सकती है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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